Bihar बिहार। बिहार के गयाजी जिले के डोभी प्रखंड स्थित गढ़ करमौनी गांव में शुक्रवार को दर्दनाक हादसा हो गया। खेत में पानी पहुंचाने के लिए कुएं में बोरिंग और मोटर का काम करने उतरे चार लोगों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। करीब 30 फीट गहरे कुएं में एक के बाद एक चार लोग उतरे, लेकिन कोई भी जिंदा बाहर नहीं आ सका। इस हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार, गढ़ करमौनी गांव में खेत की सिंचाई के लिए कुएं में लगी बोरिंग का सेक्शन जोड़ने और मोटर से जुड़े काम किए जा रहे थे। इसी दौरान सबसे पहले चमारी मांझी कुएं के अंदर उतरे। काफी समय तक जब वह बाहर नहीं आए तो उनके बेटे दिलचंद मांझी ने उन्हें बचाने के लिए कुएं में प्रवेश किया। इसके बाद विकास चौधरी और विजय चौधरी भी एक-एक कर कुएं में उतर गए।
बताया जा रहा है कि कुएं के अंदर जहरीली गैस फैली हुई थी और ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम थी। इसके कारण चारों लोग दम घुटने से बेहोश हो गए और उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन कुएं के अंदर का वातावरण बेहद खतरनाक होने के कारण कोई नीचे उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। मृतकों की पहचान चमारी मांझी, दिलचंद मांझी, विकास चौधरी और विजय चौधरी के रूप में हुई है। इनमें चमारी मांझी और दिलचंद मांझी पिता-पुत्र थे। एक ही परिवार के दो लोगों समेत चार लोगों की मौत से गांव में मातम पसरा हुआ है।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। बचाव अभियान के दौरान जहरीली गैस का असर इतना ज्यादा था कि फायर ब्रिगेड कर्मी अजीत कुमार भी इसकी चपेट में आकर बेहोश हो गए। हालांकि बाद में उनकी हालत सामान्य हो गई। इसके बाद सुरक्षा उपकरणों की मदद से रेस्क्यू टीम ने कुएं में उतरकर शवों को बाहर निकाला। डोभी थाना पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुएं के अंदर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण यह हादसा हुआ। अधिकारियों ने बताया कि एक व्यक्ति को बचाने के प्रयास में बाकी लोग भी कुएं में उतरते गए और सभी इसकी चपेट में आ गए।
घटना की जानकारी मिलते ही शेरघाटी एसडीओ, डीएसपी, डोभी बीडीओ समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों के परिजनों को आपदा राहत कोष से चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यह हादसा एक बार फिर बंद और गहरे स्थानों में बिना सुरक्षा जांच के उतरने के खतरे को सामने लाता है। कुएं, टैंक या अन्य बंद जगहों में जहरीली गैस जमा हो सकती है, जिसकी जानकारी बाहर से नहीं मिलती। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर काम करने से पहले गैस की जांच और सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
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