Kullu. कुल्लू। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देव वाद्ययंत्रों की लय और उसी ताल पर थिरकते देवलू अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में रविवार को ढालपुर का नजारा देव आस्था के रंग में रंगा नजर आया। जैसे ही देव वाद्ययंत्रों की धुन गूंजी, देवता रथ में विराजमान होकर अठारह करडू की सौह में उतरे तो उनके साथ चल रहे देवलू भी खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। देव धुन पर झूमते देवलुओं और रथ में विराजमान देवताओं का यह दृश्य उत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। देव वाद्ययंत्रों की हर थाप के साथ माहौल में भक्ति और उल्लास का संचार होता रहा।
देवलू पारंपरिक अंदाज में कदम मिलाते हुए आगे बढ़ते रहे] वहीं देव रथों के साथ चलती टोलियों ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया। इस दौरान ढालपुर में मौजूद लोगों की नजरें इस अनूठे दृश्य पर टिकी रहीं। कुल्लू दशहरा की खासियत यही है कि यहां देव परंपराएं केवल निभाई नहीं जातीं, बल्कि जनजीवन में रची-बसी संस्कृति के रूप में दिखाई देती हैं। बता दें, देवताओं के आगमन, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज और देवलुओं के सामूहिक नृत्य में आस्था की गहराई साफ झलकती है। देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों के लिए भी यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहीं कारोबारियों को भी उम्मीद जगी है।
ढालपुर में देव धुन पर थिरकते देवता और देवलू एक बार फिर यह संदेश देते नजर आए कि कुल्लू दशहरा की असली पहचान देव संस्कृति, लोक परंपराओं और लोगों की अटूट आस्था में बसती है। कुल्लू दशहरा की विशेषता यहां आयोजित होने वाला देव समागम है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवता अपने देवालयों से निकलकर ढालपुर पहुंचते हैं। इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए पर्यटकों में खासा उत्साह रहता है। वहीं, ग्लोबल डांस, लेजर शो और ड्रोन शो जैसे कार्यक्रम उत्सव को अंतरराष्ट्रीय रंग दे रहे हैं।