दिल्ली। देशभर में गुरुवार को करवा चौथ का पर्व श्रद्धा, उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। जम्मू-कश्मीर से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश तक सुहागिन महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखा। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक पूजा-अर्चना की, जबकि कुछ जगहों पर बारिश और बादलों के कारण चांद के दर्शन में देरी हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद रवि किशन के परिवारों में भी करवा चौथ की विशेष रौनक देखने को मिली।


जम्मू-कश्मीर के जम्मू में महिलाओं ने करवा चौथ के अवसर पर सामूहिक पूजा का आयोजन किया। महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने पतियों की दीर्घायु की कामना की। इस दौरान महिलाओं ने करवा चौथ की कथा सुनी और एक-दूसरे को त्योहार की शुभकामनाएं दीं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पत्नी साधना सिंह के साथ करवा चौथ का त्योहार मनाया। चांद निकलने के बाद साधना सिंह ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंद्रमा के दर्शन किए और अपना व्रत खोला। शिवराज सिंह चौहान भी इस दौरान अपनी पत्नी के साथ मौजूद रहे। दोनों ने पारिवारिक परंपराओं के अनुसार त्योहार मनाया।


वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बारिश के कारण चांद के दर्शन नहीं होने से व्रत रखने वाली महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। भाजपा सांसद और अभिनेता रवि किशन की पत्नी प्रीति शुक्ला ने बताया कि उन्होंने करवा चौथ की पूजा पूरी कर ली है, लेकिन चांद दिखाई नहीं देने के कारण उनका व्रत जारी है। उन्होंने कहा, "जब तक चांद दिखाई नहीं देता, तब तक व्रत चलता है। लखनऊ में बारिश के कारण चांद नजर नहीं आ रहा है। मैंने पूजा कर ली है, लेकिन चांद देखे बिना पानी पीना संभव नहीं लग रहा।"
प्रीति शुक्ला ने बताया कि उनके पति रवि किशन ने भी करवा चौथ का व्रत रखा है। उन्होंने कहा कि पति के आग्रह और उनके भोजन करने के लिए उन्होंने पानी की एक बूंद पी थी। उनका यह बयान चर्चा का विषय बना रहा। इधर, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में चांद दिखाई देने के बाद महिलाओं ने अपने पतियों के साथ करवा चौथ की पूजा की। महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर पारंपरिक तरीके से व्रत खोला। इस दौरान परिवारों में उत्सव का माहौल रहा। करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और पारिवारिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं ने स्थानीय परंपराओं के अनुसार यह पर्व मनाया। कहीं सामूहिक पूजा हुई, तो कहीं दंपतियों ने घरों में चंद्र दर्शन के बाद व्रत संपन्न किया।
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