'हे देवेश्वरी! आप भक्तों की संकटों से रक्षा करती हैं', पीएम मोदी ने मां सिद्धिदात्री से की मंगलकामना
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देवी दुर्गा का स्मरण करते हुए सुभाषित साझा किया गया। उन्होंने अपने इस पोस्ट में देवी की स्तुति करते हुए लिखा कि जो आपका चिंतन करते हैं, आप उनकी संकटों से रक्षा करती हैं।
पीएम मोदी की ओर से संस्कृत श्लोक, "यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते। ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः।" शेयर किया गया, जिसका हिंदी में भावार्थ है कि जो भक्त भक्तिपूर्वक देवी दुर्गा का स्मरण करते हैं, उनकी निश्चय ही उन्नति और वृद्धि होती है। हे देवेश्वरी! जो आपका चिंतन करते हैं, आप उनकी संकटों से रक्षा करती हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक श्रीदेवीकवचम्' (दुर्गा कवच) का 8वां श्लोक है, जिसमें यह श्लोक 'श्रीदेवीकवचम्' (दुर्गा कवच) का 8वां श्लोक है। इसमें देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनके स्मरण व कवच के प्रभाव का वर्णन करते हुए मां की महिमा बताई गई है। इस श्लोक से ठीक पहले संकट, युद्ध और भय से मुक्ति का प्रसंग है।
इस श्लोक के माध्यम से देवी से प्रार्थना की जाती है कि हे देवेश्वरी! जिन लोगों ने भक्तिपूर्वक आपका स्मरण किया है, उनका निश्चय ही अभ्युदय (विकास/वृद्धि) होता है। जो लोग आपका चिंतन करते हैं, आप निःसंशय ही उनकी रक्षा करती हैं।
नवरात्र के आखिरी दिन सोमवार को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जा रही है। सिद्धि' का अर्थ है पूर्णता या सामर्थ्य और 'दात्री' का अर्थ है देने वाली। यह देवी भक्तों को अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व और वशित्व जैसी आठ सिद्धियां प्रदान करती हैं।
मां सिद्धिदात्री का वाहन सिंह (शेर) माना जाता है। उनके चार भुजाएं हैं। दाहिने हाथों में गदा और चक्र तथा बाएं हाथों में कमल पुष्प और शंख सुशोभित रहते हैं। देवी का यह स्वरूप शक्ति, सिद्धि और दिव्य ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कृपा से अनेक सिद्धियां प्राप्त की थीं। कहा जाता है कि देवी की अनुकंपा से ही शिव का आधा स्वरूप शक्ति के रूप में अभिव्यक्त हुआ और वे अर्धनारीश्वर कहलाए। अर्धनारीश्वर स्वरूप शिव और शक्ति की अभिन्न एकता तथा सृष्टि में स्त्री-पुरुष ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
मां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा, पूरी, काले चने और मौसमी फलों का भोग अति प्रिय है। मां को लाल या नीले रंग के पुष्प विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं, जिनमें कमल का फूल प्रमुख है। महानवमी के दिन कन्या पूजन और प्रसाद अर्पण का विशेष विधान होता है।