कर्नाटक: पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने चुनावी राजनीति को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने घोषणा की है कि वह वर्ष 2028 में होने वाला कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। सिद्धरमैया ने अपने फैसले के पीछे बढ़ती उम्र, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार को प्रमुख कारण बताया है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि चुनावी राजनीति से दूरी बनाने के बाद भी वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे और जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे।
79 वर्षीय सिद्धरमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लंबे राजनीतिक सफर के बाद अब वह भविष्य में चुनाव नहीं लड़ने का मन बना चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक अनुभवों और मौजूदा चुनावी व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि राजनीति का स्वरूप बदल गया है और इसमें ईमानदारी के लिए जगह कम होती जा रही है।
सिद्धरमैया ने अपने बयान में कहा कि आज चुनाव लड़ने के लिए कई बार लोगों को पैसे देने पड़ते हैं। उन्होंने मौजूदा चुनावी राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और ऐसा लगता है कि ईमानदार राजनीति का अस्तित्व कमजोर पड़ रहा है। इसी कारण उन्होंने भविष्य में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि अगर आज के हालात में चुनाव लड़ना पड़े तो कई ऐसी चीजों का सामना करना पड़ता है जो उनके सिद्धांतों के खिलाफ हैं। सिद्धरमैया ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी विचारधारा और मूल्यों के आधार पर राजनीति की है और आगे भी वह उन्हीं सिद्धांतों पर कायम रहेंगे।
सिद्धरमैया ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य को भी फैसले की एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के पूरा होने तक उनकी उम्र 81 से 82 वर्ष हो जाएगी। पहले की तरह लगातार मेहनत करने और लंबे समय तक सक्रिय रहने की क्षमता अब कम हो रही है। उन्होंने कहा कि शरीर पहले जैसा साथ नहीं दे रहा है और उसी ऊर्जा के साथ काम करना मुश्किल हो गया है।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पांच दशक लंबे राजनीतिक सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 में उनके सार्वजनिक जीवन में प्रवेश को 50 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
सिद्धरमैया ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। उन्हें चुनावों में जीत और हार दोनों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्हें इस बात का संतोष है कि उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और जनता के हितों को प्राथमिकता दी।
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र वरुणा के लोग उन पर दोबारा चुनाव लड़ने का दबाव बना रहे थे, लेकिन उन्होंने अपना फैसला तय कर लिया है। उन्होंने कहा कि अब वह चुनावी राजनीति से बाहर रहकर भी जनता की समस्याओं और अधिकारों के लिए काम करते रहेंगे।
सिद्धरमैया ने राज्य की जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि पिछले पांच दशकों में लोगों ने उन्हें अपना समझकर समर्थन और प्यार दिया है। उन्होंने कहा कि जनता का यह विश्वास उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और उनका आगे का जीवन जनसेवा के लिए समर्पित रहेगा।
सिद्धरमैया का यह ऐलान कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। वह राज्य के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और दो बार मुख्यमंत्री का पद संभाल चुके हैं। उनके चुनावी राजनीति से दूरी बनाने के फैसले को कांग्रेस के साथ-साथ राज्य की राजनीतिक दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने की बात नहीं कही है और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहने का संकल्प दोहराया है।