संसद के मकर द्वार पर सरकार और विपक्ष का प्रदर्शन, आमने-सामने आए

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Update: 2026-07-23 05:13 GMT

नई दिल्ली: संसद के गलियारे में सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष का माहौल साफ़ नजर आ रहा है. संसद के बाहर, सदन के बाहर और पूरे परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे के खिलाफ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. जिस तरह का गतिरोध बना हुआ है, उसे तोड़ने की कोशिश दोनों पक्ष करना चाहते हैं. दोनों चाहते हैं कि सदन के अंदर चर्चा हो, लेकिन चर्चा किस नियम के तहत होगी और कितनी देर चलेगी, यह अभी तय नहीं हो पाया है.

कल संसदीय कार्य मंत्री ने लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में कहा था कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है. किस नियम के तहत चर्चा होगी, यह बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में तय हो जाएगा. लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच रस्साकशी बनी हुई है. कोई भी पक्ष दूसरे की बात सुनने को तैयार नहीं है. आज सत्ता पक्ष की ओर से एनडीए का प्रदर्शन हो रहा है. उनका कहना है कि राहुल गांधी जिस तरह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे, उससे प्रधानमंत्री की सुरक्षा को खतरा पैदा हुआ.
प्रियंका गांधी ने कहा, मैंने कहा, समय आ गया है कि नेतृत्व दिखाया जाए. बच्चे कुछ कह रहे हैं, पहले उनकी बात सुनिए. उनकी मांगें क्या हैं? उनकी मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं. पहली मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. दूसरी मांग है कि जिन लोगों ने इन बच्चों को मारा-पीटा है, उनके खिलाफ कार्रवाई हो. तीसरी बात, इनकी जो भी मांगें हैं, उन्हें पहले पूरा कीजिए. यह इतना मुश्किल नहीं है. सिस्टम पर बच्चों का, छात्रों का भरोसा टूट गया है. ऐसे में अगर उसी सिस्टम के जरिए आप कोई समाधान देंगे, तो छात्र उसे स्वीकार नहीं करेंगे. यह बहुत सीधी-सी बात है, जिसे हर मां-बाप जानते हैं. यही बात हमारे प्रधानमंत्री और देश के नेताओं को भी समझनी चाहिए. अगर उन्हें समाधान निकालना है, तो पहले बच्चों की बात सुननी होगी. जो उनकी मांगें हैं, उन्हें पहले पूरा करना होगा. तभी समाधान निकलेगा. जब भरोसा ही नहीं है, तो आप कह रहे हैं कि वही सिस्टम जांच करेगा.
उन्होंने कहा कि छात्र वही बात तो नहीं मान रहे हैं. कभी-कभी ऐसा समय आता है, जब नेता को अपना भय छोड़कर जनता की बात सुननी पड़ती है. आज वही समय आ गया है. हजारों बच्चे सड़कों पर हैं. हजारों बच्चे इंडिया गेट पर हैं. हजारों बच्चे पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं. जंतर-मंतर पर हैं और आंदोलन के लिए तैयार हैं. इस पूरे मामले का समाधान सामूहिक होना चाहिए और रचनात्मक होना चाहिए. सवाल: लेकिन कल छात्रों पर लाठियां चलीं, वे घायल हुए.
उन्होंने कहा कि जब भरोसा टूट जाता है और अगर आपको उस भरोसे को फिर से बनाना है, तो आपको उसी सिस्टम से बाहर निकलकर कुछ कदम उठाने होंगे. क्या कदम उठाने होंगे? अपने मंत्री से इस्तीफा लीजिए. क्या कदम उठाने होंगे? जिन बच्चों के साथ मारपीट हुई है, उस पर कार्रवाई कीजिए. ऐसा तो नहीं हो सकता कि रात में आप बच्चों को मारें-पीटें और सुबह ट्वीट करें कि हमें बच्चों की बहुत परवाह है. अगर सच में परवाह है, तो फिर उन्हें पीटा क्यों गया? उन पर लाठियां क्यों चलाई गईं? उन पर आंसू गैस क्यों छोड़ी गई? अगर सच में बच्चों की चिंता है, तो उन्हें बुलाइए, उनसे बात कीजिए. उनसे संवाद कीजिए.
कॉकरोच पार्टी के चीफ अभिजित दिपके ने पथराव और हिंसा पर सफाई दी है. दिपके का कहना है कि ये हिंसा और पथराव बाहर से आए लोग फैला रहे हैं. छात्र ऐसा नहीं कर रहे हैं. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों पर हुए कथित लाठीचार्ज के लिए माफी मांगने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की भी मांग की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के ऐलान पर CJP नेता अशुतोष रांका ने कहा कि सरकार बीमारी नहीं बल्कि केवल उसके लक्षणों का इलाज कर रही है. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई.
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पंजाबी बाग के ACP जय प्रकाश ने कहा कि संसद मार्ग की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कुछ लोगों ने पानी की बोतलें और पत्थर फेंके. उन्होंने बताया कि एक पत्थर उनके माथे पर लगा और फिलहाल उनका इलाज RML अस्पताल में चल रहा है.
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