दिल्ली-NCR में बारिश बनी आफत: सड़कें बनीं तालाब, जाम से थमी रफ्तार

बड़ी खबर

Update: 2026-07-09 18:50 GMT
New Delhi. नई दिल्ली। मानसून की पहली तेज बारिश ने एक बार फिर दिल्ली-NCR समेत देश के कई हिस्सों में प्रशासनिक तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है। गुरुवार को रातभर हुई बारिश के बाद दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में जलभराव हो गया। सड़कें तालाब में बदल गईं, वाहन पानी में फंस गए और कई जगह घंटों ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। वहीं गाजियाबाद में करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश को आमतौर पर राहत और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। किसान इसके इंतजार में रहते हैं, सूखी धरती को पानी मिलता है और फसलों को जीवन मिलता है। लेकिन देश के बड़े शहरों में यही बारिश अब हर साल परेशानी का कारण बन रही है। कुछ घंटों की बारिश के बाद सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और आम लोगों को गंदे पानी, जाम और अव्यवस्था से जूझना पड़ता है।
दिल्ली-NCR में जलभराव से थमी रफ्तार
रातभर हुई बारिश के बाद नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के कई इलाकों में पानी भर गया। पॉश इलाकों में भी जलभराव की समस्या देखने को मिली। वसुंधरा, इंदिरापुरम समेत कई क्षेत्रों में सड़कें पानी से भर गईं। वाहन चालकों को घंटों परेशानी का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद में कई जगह वाहन पानी में बंद हो गए। इंदिरापुरम इलाके में करंट लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं एमिटी स्कूल की एक बस सड़क पर फंस गई, जिसे लोगों ने धक्का देकर बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि उस समय बस में बच्चे मौजूद नहीं थे। एक अन्य घटना में ऑटो बीच सड़क पर खराब हो गया, जिसे स्कूली बच्चों को धक्का लगाते देखा गया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी और लोगों ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए।
स्कूलों को लेकर प्रशासनिक तालमेल पर सवाल
भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद कई स्कूल खुले रहे। गाजियाबाद में प्रशासन ने छुट्टी का आदेश तब जारी किया जब कई स्कूल बसें बच्चों को लेने निकल चुकी थीं। नोएडा में भी कई स्कूलों में बच्चों को बुलाया गया, लेकिन बाद में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण समय से पहले छुट्टी करनी पड़ी। अभिभावकों का कहना है कि जब मौसम विभाग पहले से भारी बारिश का अलर्ट जारी कर चुका था, तो स्कूल बंद करने का फैसला पहले क्यों नहीं लिया गया।
नोएडा में भी दिखा जलभराव का असर
आधुनिक और योजनाबद्ध शहर के रूप में पहचान रखने वाले नोएडा में भी बारिश के बाद हालात बिगड़ गए। कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया। फादर एग्नेल स्कूल के आसपास सड़कें जलमग्न हो गईं। सुबह ऑफिस जाने वाले लोग ट्रैफिक जाम में फंसे रहे। कई दोपहिया वाहन चालक पानी में फंस गए और लोगों को पैदल ही जलभराव पार करना पड़ा।
पुराने ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल
बारिश के बाद दिल्ली के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली का मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम कई दशक पुराना है और इसे पुराने समय की आबादी तथा बारिश के पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। लेकिन सवाल यह है कि जब सामान्य बारिश में ही शहर डूबने लगे तो समस्या केवल पुराने सिस्टम की नहीं बल्कि उसकी सफाई, रखरखाव और प्रबंधन की भी है। दिल्ली में ड्रेनेज और सीवेज व्यवस्था कई एजेंसियों के बीच बंटी हुई है। नगर निगम, एनडीएमसी, पीडब्ल्यूडी, डीडीए और दिल्ली जल बोर्ड जैसी संस्थाएं अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालती हैं। जिम्मेदारियों के बंटवारे के कारण कई बार जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है।
कई इलाकों में सीवर ओवरफ्लो
बारिश के बाद दिल्ली के राजघाट, बीडी मार्ग, लक्ष्मी नगर और सदर बाजार जैसे इलाकों में जलभराव देखने को मिला। कई जगह सीवर का गंदा पानी सड़क पर बहता नजर आया। लक्ष्मी नगर में सुबह से ही ट्रैफिक की रफ्तार धीमी रही। कई अभिभावकों को छोटे बच्चों को गोद में उठाकर पानी भरी सड़कों को पार कराना पड़ा।
देश के अन्य हिस्सों में भी बारिश का कहर
बारिश का असर केवल दिल्ली-NCR तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण कई जगह नाले उफान पर आ गए। लोगों को जान जोखिम में डालकर रास्ते पार करने पड़े। कई इलाकों में सड़कें बंद होने की खबर सामने आई। महाराष्ट्र के रायगढ़ में भी भारी बारिश के बाद पातालगंगा नदी में बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर बहते नजर आए। बताया गया कि गोदाम में पानी भरने से करीब तीन हजार सिलेंडर बह गए। उत्तराखंड समेत कई राज्यों में मौसम विभाग ने भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और अचानक जलभराव का खतरा बढ़ गया है।
बदलते मौसम ने बढ़ाई चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। अब कम समय में ज्यादा बारिश होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यही कारण है कि शहरों के पुराने जलनिकासी सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। पहाड़ों में बादल फटने जैसी घटनाएं और मैदानी क्षेत्रों में अचानक जलभराव अब सामान्य चुनौती बनती जा रही है।
स्थायी समाधान की जरूरत
हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था सुधारने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली तेज बारिश में ही व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। जरूरत है कि शहरों के ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक बनाया जाए, सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल हो और मौसम चेतावनी के आधार पर समय रहते फैसले लिए जाएं। बारिश अपने आप में समस्या नहीं है, समस्या है उससे निपटने की तैयारी की कमी। जब तक प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक जिम्मेदारी दोनों मजबूत नहीं होंगी, तब तक हर मानसून में दिल्ली-NCR समेत देश के कई शहरों में यही तस्वीर दोहराती रहेगी।
Tags:    

Similar News