तिरुवनंतपुरम। केरल में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। राज्य विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की बड़ी संख्या राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं का शिकार हुई है। सरकार ने तेज रफ्तार और यातायात नियमों के उल्लंघन को सड़क दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बताया है। इसके साथ ही दुर्घटना संभावित इलाकों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर 5,991 लोगों की मौत
मंत्री कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच राज्य में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़ी 11,697 मौतों में से 5,991 राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं। यह कुल मौतों का लगभग 51 प्रतिशत है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों और यात्रियों के सामने गंभीर सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। विधानसभा में विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने कहा कि सड़क हादसों के लिए केवल सड़कों की खराब स्थिति को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। उन्होंने बताया कि वाहनों की अत्यधिक रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी भी दुर्घटनाओं की प्रमुख वजह बन रही है।
तेज रफ्तार और लापरवाही बनी बड़ी चुनौती
मंत्री ने स्वीकार किया कि सड़कों की खामियां भी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ वाहन चालकों की जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन करवाना और दुर्घटना संभावित सड़कों को सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। सड़क निर्माण और मरम्मत के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
दुर्घटना वाले इलाकों की हो रही पहचान
सरकार ने सड़क हादसों को रोकने के लिए दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज की है। राष्ट्रीय परिवहन योजना एवं अनुसंधान केंद्र (एनएटीपीएसी) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है, जिन्हें 'ब्लैक स्पॉट' कहा जाता है। इन स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। पुलिस, मोटर वाहन विभाग और सड़क प्रबंधन एजेंसियां संयुक्त निरीक्षण कर दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाती हैं। निरीक्षण के दौरान सड़क की बनावट, खतरनाक मोड़, दृश्यता, वाहनों की गति और उपलब्ध सुरक्षा सुविधाओं का आकलन किया जाता है। इसके आधार पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की जाती है।
खतरनाक मोड़ों पर लगेंगे सुरक्षा उपकरण
सरकार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित स्थानों को सुरक्षित बनाने के लिए अस्थायी और स्थायी दोनों तरह के उपाय किए जा रहे हैं। इनमें सौर ऊर्जा से संचालित ब्लिंकर, रंबल स्ट्रिप्स, स्पीड हंप, रिफ्लेक्टिव रोड साइन, रोड मार्किंग और रोड स्टड जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। इसके अलावा खतरनाक मोड़ों और सड़कों के बीच धातु के क्रैश बैरियर तथा वायर-रोप बैरियर लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य दुर्घटना होने की स्थिति में वाहनों को सड़क से बाहर जाने या विपरीत दिशा के यातायात में घुसने से रोकना और हादसों की गंभीरता कम करना है।
सड़क निर्माण से पहले सुरक्षा का आकलन
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि किसी सड़क के पुनर्निर्माण का अनुमान तैयार करने से पहले उसकी वर्तमान स्थिति, पूर्व में हुई दुर्घटनाओं और सुरक्षा संबंधी जोखिमों का अध्ययन किया जाता है। इस प्रक्रिया में यह देखा जाता है कि सड़क के किन हिस्सों में अधिक खतरा है और वहां किस प्रकार के सुधार किए जाने चाहिए। इसके बाद निर्माण एवं मरम्मत की योजनाओं में आवश्यक सुरक्षा उपाय शामिल किए जाते हैं। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक अध्ययन और विभागीय समन्वय से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में सहायता मिल सकती है।
सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ड्राइविंग जरूरी
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाली मौतों का बड़ा अनुपात यह संकेत देता है कि बेहतर सड़क निर्माण के साथ यातायात नियमों का प्रभावी पालन भी आवश्यक है। तेज रफ्तार, खतरनाक तरीके से वाहन चलाना और सुरक्षा नियमों की अनदेखी यात्रियों की जिंदगी को जोखिम में डाल सकती है। सरकार के सामने चुनौती केवल सड़कों की खामियों को दूर करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों में जिम्मेदार ड्राइविंग की आदत विकसित करना भी है।