हाईकोर्ट से झटके के बाद शिवसेना पार्षद ने किया सरेंडर, एक दिन पहले रद्द हुई थी जमानत
गुंडागर्दी पड़ी भारी.
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के एक अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ सरेआम मारपीट करने के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने रविवार को आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। यह कदम उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से उनकी जमानत रद्द किए जाने के ठीक एक दिन बाद उठाया है।
हाईकोर्ट ने शनिवार को म्हात्रे की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें रविवार शाम 5 बजे तक हर हाल में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का कड़ा आदेश दिया था। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखद की खंडपीठ ने कल्याण मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा रमेश म्हात्रे को दी गई जमानत को पूरी तरह से रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आरोपी के गंभीर आपराधिक इतिहास को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी- "भले ही आरोपी को 17 मामलों में बरी कर दिया गया हो, लेकिन अदालत को इस तथ्य पर विचार करना चाहिए था कि उसके खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास सहित कुल 18 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें से कुछ बेहद गंभीर और जघन्य प्रकृति के थे।"
इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मारपीट कांड के विरोध में डॉक्टरों से 20 जुलाई (सोमवार) को होने वाली अपनी प्रस्तावित हड़ताल पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
गौरतलब है कि देश में डॉक्टरों के सबसे बड़े संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस घटना के विरोध में सोमवार को पूरे महाराष्ट्र के अस्पतालों में 24 घंटे के लिए चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से बंद करने का एलान किया था। अब मुख्य आरोपी के जेल जाने और कोर्ट की अपील के बाद देखना होगा कि डॉक्टरों का संगठन इस हड़ताल को लेकर क्या फैसला करता है।