New Delhi. नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को एक बार फिर खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं रोकी गई तो संगठन दोबारा देशव्यापी धरना-प्रदर्शन शुरू करने के लिए मजबूर होगा। पार्टी का आरोप है कि पहले हुए समझौते के बावजूद विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, उन पर निगरानी रखी जा रही है और उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। सीजेपी का कहना है कि यह भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन और आपसी सहमति का स्पष्ट उल्लंघन है।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को टैग किया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि संगठन लगातार यह देख रहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने को लेकर हुए समझौते का पालन नहीं किया जा रहा है। उनका दावा है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छात्रों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में भी आंदोलन से जुड़े लोगों पर नजर रखी जा रही है और उन्हें अलग-अलग तरीकों से परेशान किया जा रहा है।
आशुतोष रांका ने विशेष रूप से दिल्ली की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने वाले स्वयंसेवकों को भी निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार ऐसे कई स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि उनका काम केवल प्रदर्शनकारियों को भोजन, पानी, आवागमन और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है और यह पहले हुए समझौते का सीधा उल्लंघन है।
सीजेपी प्रवक्ता ने सरकार से मांग की कि कानूनी मामलों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई न करने से संबंधित लिखित समझौते की प्रति संगठन को तत्काल उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज भारत सरकार द्वारा तय समयसीमा के अनुरूप साझा किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद न रहे। उनका कहना था कि यदि सरकार इस दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाती और राज्यों में कार्रवाई जारी रहती है तो संगठन फिर से धरना-प्रदर्शन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
इससे पहले सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी इसी मुद्दे पर बयान जारी किया था। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन भारत सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद ही वापस लिया था। उस समय सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया गया था कि किसी भी बीजेपी या एनडीए शासित राज्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसी भरोसे के आधार पर संगठन ने अपना आंदोलन स्थगित किया था। सौरव दास ने आरोप लगाया कि अब असम, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने, गिरफ्तार करने और उन्हें निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सिलसिला जारी रहता है तो इसे सरकार के वादे से पीछे हटना माना जाएगा। साथ ही उन्होंने इसे उन लाखों युवाओं के विश्वास के साथ विश्वासघात बताया, जिन्होंने सरकार के आश्वासन पर भरोसा किया था।
उन्होंने यह भी कहा कि संगठन सभी प्रदर्शनकारियों के साथ मजबूती से खड़ा है और किसी को भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उनके अनुसार सीजेपी की कानूनी टीम विभिन्न राज्यों में वकीलों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि हिरासत में लिए गए लोगों की जल्द रिहाई सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा जिन लोगों पर कानूनी कार्रवाई की गई है, उन्हें हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन की शुरुआत से ही संगठन यह जिम्मेदारी निभा रहा है और आगे भी जारी रखेगा। सीजेपी नेताओं का कहना है कि आंदोलन वापस लेने का निर्णय सरकार के साथ बने भरोसे के आधार पर लिया गया था। इसलिए अब यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं होता है तो संगठन के सामने फिर से आंदोलन शुरू करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि वह संबंधित राज्यों के प्रशासन को स्पष्ट निर्देश जारी करे ताकि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई रोकी जा सके और पहले हुए समझौते का सम्मान किया जाए।
हालांकि, इस पूरे मामले में केंद्र सरकार या संबंधित राज्य सरकारों की ओर से सीजेपी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरकार का क्या रुख है और क्या वास्तव में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई औपचारिक समझौता हुआ था। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और इस मुद्दे पर होने वाले घटनाक्रम पर सभी की नजरें रहेंगी। यदि सीजेपी अपनी चेतावनी के अनुरूप दोबारा राष्ट्रव्यापी धरना शुरू करती है तो इसका असर कई राज्यों में देखने को मिल सकता है। फिलहाल संगठन सरकार से लिखित आश्वासन और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।