महिला की सैलरी 8 लाख प्रतिमाह, तलाक केस में पति से 1 लाख की डिमांड, याचिका ख़ारिज

पढ़े पूरी खबर

Update: 2026-07-26 01:52 GMT

बॉम्बे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति से अधिक वेतन पाने वाली महिला की अंतरिम भरण-पोषण की याचिका को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आईटी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण पति की नौकरी जोखिम में पड़ सकती है। ऐसे में विदेश में रहने की ऊंची लागत को आधार बनाकर अधिक कमाने वाली पत्नी अपने पति से भरण-पोषण की मांग नहीं कर सकती है। यह फैसला न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति मंजूषा देशपांडे की पीठ ने महिला द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसने अपने पति से एक लाख रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी।

याचिकाकर्ता महिला वर्तमान में अमेरिका के न्यू जर्सी में रह रही है। 2011 से संयुक्त राज्य अमेरिका में ही रह रही है। वह नई दिल्ली स्थित आईटी कंपनी मार्क इंफोटेक के साथ काम कर रही है और प्रति माह लगभग 8 लाख रुपये (लगभग 8700 अमेरिकी डॉलर) कमाती है। उसका पति भी आईटी क्षेत्र में नौकरी करता है। उसकी मासिक आय उसकी पत्नी से कम है। पारिवारिक विवाद के बाद महिला ने पति से 1 लाख रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। महिला की दलील यह थी कि अमेरिका में रहने और जीवन यापन का खर्च भारत की तुलना में बहुत अधिक है, इसलिए उसकी अधिक आय के बावजूद उसे पति से वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महिला की दलीलों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट किया कि विदेश में रहने की केवल अधिक लागत के आधार पर कोई पत्नी अपने कम कमाने वाले पति से भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती। पीठ ने सुनवाई के दौरान आईटी सेक्टर की अनिश्चितताओं और एआई के प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा, "आईटी क्षेत्र में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दायरा तेजी से विस्तार ले रहा है। इससे पति की नौकरी पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। जब महिला स्वयं अपने पति से अधिक राशि अर्जित कर रही है तो ऐसे में पति पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं है।"

हाईकोर्ट जाने से पहले महिला ने फैमिली में अर्जी दाखिल की थी। इस अदालत ने भी उसके वित्तीय रिकॉर्ड और आय का आकलन करने के बाद भरण-पोषण की याचिका को खारिज कर दिया था। हालांकि अदालत ने पति को कानूनी लड़ाई के खर्च के रूप में पत्नी को 25000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। आपको बता दें कि दोनों के दो बच्चे हैं। अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, बड़ा बच्चा पिता के साथ में रह रहा है, जबकि छोटे बच्चे की कस्टडी मां के पास है।

Tags:    

Similar News