मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में भी हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह भी हंगामे के साथ शुरू हुआ। सोमवार को संसद के दोनों सदनों राज्यसभा व लोकसभा में हंगामा हुआ जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि युवाओं की इस तरह पिटाई की गई हो और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया हो।
दरअसल नीट प्रदर्शनकारियों पर पुलिस करवाई को लेकर विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में स्थगन प्रस्ताव दिया था। विपक्ष ने नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की। नीट परीक्षा व पेपर लीक के मुद्दे पर बीते दिनों जंतर मंतर पर प्रदर्शन हुआ था। खड़गे ने यहां की गई पुलिस कार्रवाई पर विरोध जताया। खड़गे ने अपनी बात रखते हुए सभापति से कहा, कि उन्होंने कार्य संचालन नियमावली के नियम 267 के तहत नोटिस दिया है।
हालांकि, विपक्षी सांसदों के नोटिस को सभापति सीपी राधाकृष्णन ने अस्वीकार कर दिया। अपने इस निर्णय पर सभापति ने कहा, “खड़गे जी, मैंने इस विषय पर पहले ही अपना निर्णय दे दिया है। उस निर्णय में मैंने स्वयं कोई असहमति व्यक्त नहीं की है। इस पर असहमति उस समिति ने जताई थी, जिसमें मनमोहन सिंह जी, प्रणब मुखर्जी जी, वाजपेयी जी और कई अन्य वरिष्ठ नेता सदस्य थे। हम बार-बार यही मुद्दा उठा रहे हैं। बताइए, क्या मुझे नियमों के अनुसार चलना चाहिए या नियम तोड़ देने चाहिए।”
इस पर खड़गे ने कहा कि इसी सदन में उपसभापति ने यह भी कहा था कि अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में नियम 267 के तहत विषयों को स्वीकार किया जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा यह विषय निश्चित रूप से अत्यंत दुर्लभ है। वहीं इसके जवाब में सभापति ने कहा कि ‘अत्यंत दुर्लभ’ स्थिति में भी पूरे सदन की सर्वसम्मति होना आवश्यक है। जब ऐसी सर्वसम्मति नहीं है, तो मैं क्या कर सकता हूं। कांग्रेस समेत विपक्षी संसद इसी नियम के तहत सदन में तुरंत चर्चा की मांग कर रहे हैं।
हालांकि चेयर द्वारा यह स्पष्ट किया गया की पूर्व में विभिन्न सभापतियों ने इस नियम को सामान्य तौर पर अस्वीकार किया और इस संबंध में रूलिंग भी दी गई है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट परीक्षा और उससे जुड़े विवादों पर तुरंत चर्चा की मांग की। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी व विपक्ष के अन्य सांसद नियम 267 के तहत सदन में इस विषय पर चर्चा करना चाहते हैं। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
गौरतलब है की नियम 267 के तहत राज्यसभा में सदन की अन्य सभी कार्यवाहियों को स्थगित कर दिया जाता है और जिस विषय पर सभापति को नोटिस दिया जाता है केवल उसी पर चर्चा होती है। यहां एक खास बात यह भी है कि इस नियम के तहत हुई चर्चा के अंत में वोटिंग प्रावधान भी है।