करवा चौथ 2026: सरगी में किस रंग के कपड़े पहनें? जानें राशि अनुसार सुझाव
धर्म डेस्क : करवा चौथ की तैयारियों में पूजा सामग्री और सरगी के साथ कपड़ों का चुनाव भी खास होता है। कोई पारंपरिक लाल साड़ी पसंद करता है, तो कोई हरे, गुलाबी या पीले रंग का सूट पहनना चाहता है। इस बार करवा चौथ गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। पर्व की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए राशि के अनुसार रंग चुनने की ज्योतिषीय सलाह भी प्रकाशित हुई है। हालांकि, शुभ रंगों का संबंध आस्था से है; किसी रंग को पहनने से सौभाग्य या वैवाहिक सुख निश्चित होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
दैनिक जागरण में प्रकाशित लेख में एस्ट्रोपत्री की ज्योतिषी पूजा आहूजा ने सरगी के समय प्रत्येक राशि के लिए कुछ रंग सुझाए हैं। उनकी बताई सूची में लाल, नारंगी, गुलाबी, हरा, पीला, सुनहरा, नीला और बैंगनी शामिल हैं। यह रंग चयन का एक ज्योतिषीय सुझाव है, व्रत का अनिवार्य नियम नहीं। महिलाएं अपनी पसंद और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भी वस्त्र चुन सकती हैं।
राशि के अनुसार सरगी में कौन-सा रंग पहनें?
राशि पूजा आहूजा के अनुसार सुझाए गए रंग
मेष लाल या नारंगी
वृषभ सफेद या गुलाबी
मिथुन हरा
कर्क सफेद या सिल्वर
सिंह सुनहरा या नारंगी
कन्या हरा या हल्का पीला
तुला लाल
वृश्चिक लाल, मरून या गोल्डन
धनु पीला या आसमानी
मकर नीला
कुंभ बैंगनी
मीन पीला या सुनहरा
यह सूची प्रकाशित ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित है।
लाल, हरे और पीले रंग को कैसे करें शामिल?
यदि आप सुझाए गए रंग में पूरा परिधान नहीं पहनना चाहतीं, तो उसे दुपट्टे, ब्लाउज या किसी छोटे हिस्से में शामिल कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, लाल साड़ी उपलब्ध नहीं है, तो अपनी पसंद के सूट के साथ लाल दुपट्टा चुना जा सकता है। हरे रंग को चूड़ियों या कपड़ों की किनारी में शामिल करना भी सजने का एक विकल्प है। यह पहनावे का व्यावहारिक सुझाव है, किसी धार्मिक विधि का विकल्प या ज्योतिषीय फल प्राप्त करने का निश्चित तरीका नहीं।
पीला और सुनहरा रंग पसंद करने वाली महिलाएं हल्के पीले सूट के साथ सुनहरे आभूषण पहन सकती हैं। नारंगी और मरून रंग भी पारंपरिक पहनावे के विकल्प हो सकते हैं। सुबह सरगी के समय हल्का परिधान और शाम को पूजा के लिए अलग वस्त्र चुनना सुविधाजनक हो सकता है। एक ही कपड़ा पूरे दिन पहनना चाहती हों, तो उसमें बैठने, चलने और दैनिक काम करने की सहजता भी देखें।
परिवार की परंपरा और अपनी पसंद का रखें ध्यान
अलग-अलग ज्योतिषीय सूचियों में एक ही राशि के लिए रंग अलग बताए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए, पूजा आहूजा के नाम से प्रकाशित दूसरे लेख में तुला राशि के लिए गुलाबी रंग सुझाया गया है, जबकि सरगी वाले लेख में लाल रंग बताया गया है। इससे स्पष्ट है कि ऐसे सुझावों को सभी के लिए एक समान अंतिम नियम नहीं समझना चाहिए। रंग को लेकर उलझन हो, तो अपनी पसंद और घर की परंपरा को प्राथमिकता देना सरल विकल्प है।
कुछ परिवार करवा चौथ के पहनावे में विशेष रंगों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में राशि की सूची और पारिवारिक रीति अलग हों, तो इसे विवाद का कारण बनाने की जरूरत नहीं है। पहले से परिवार के साथ बात करके कपड़े तय किए जा सकते हैं। नया परिधान खरीदना भी जरूरी नहीं। पहले से उपलब्ध पसंदीदा साड़ी या सूट को अलग दुपट्टे और साधारण श्रृंगार के साथ नया रूप दिया जा सकता है।
सरगी की परंपरा क्या है?
सरगी व्रत शुरू होने से पहले, सूर्योदय से पूर्व ग्रहण किया जाने वाला भोजन है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल, मिठाई, मेवे और परिवार की परंपरा के अनुसार दूसरी चीजें शामिल होती हैं। कुछ स्थानों पर श्रृंगार का सामान भी दिया जाता है। सरगी की सामग्री और उसे देने का तरीका क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार बदल सकता है। इसे सास-बहू के बीच स्नेह और शुभकामनाओं की परंपरा के रूप में भी देखा जाता है।
सुबह की तैयारी सहज रखने के लिए कपड़े, जरूरी सामान और पूजा सामग्री पहले से व्यवस्थित कर लें। भारी कढ़ाई, बहुत लंबे पल्लू या बार-बार संभालने वाले दुपट्टे से असुविधा हो सकती है। पूजा में दीपक के आसपास बैठते समय कपड़ों को लौ से दूर रखें। श्रृंगार अपनी सुविधा के अनुसार करें और केवल तस्वीरों या दूसरों से तुलना के कारण अतिरिक्त खर्च करने का दबाव न लें।
पूजा और चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार देखें
द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में 29 अक्टूबर को करवा चौथ पूजा का समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक है। चंद्रोदय रात 8:17 बजे बताया गया है। ये समय नई दिल्ली के लिए हैं; दूसरे शहरों में अंतर हो सकता है। सरगी की तैयारी के लिए भी अपने स्थान का सूर्योदय समय देखें। पूजा में भगवान शिव और उनके परिवार की आराधना तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। drikpanchang.com
राशि के अनुसार रंग चुनना चाहें, तो इस सूची को पहनावे का एक वैकल्पिक आधार बना सकती हैं। पसंदीदा रंग उपलब्ध न होने पर व्रत में कमी रह जाने का भय न रखें। आरामदायक कपड़े, अपनी परंपरा की समझ और परिवार के साथ सहज तैयारी इस अवसर को बेहतर बना सकती है। रंगों से जुड़े दावों को ज्योतिषीय विश्वास की सीमा में ही समझें।