Karwa Chauth ज्योतिष न्यूज़: करवा चौथ का पर्व विवाहित महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करते हुए उपवास करती हैं। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत परंपरागत रूप से चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए चंद्रोदय का समय, अर्घ्य देने की
विधि और पारण
का सही तरीका जानना जरूरी होता है।
करवा चौथ व्रत पारण समय 2026
पंचांग के अनुसार, करवा चौथ 2026 पर दिल्ली में चंद्रमा रात लगभग 8 बजकर 17 मिनट पर निकलने की संभावना है। ऐसे में चंद्र दर्शन और पूजा के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। इस पर्व पर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करना विशेष परंपरा मानी जाती है। चंद्र देव की पूजा करने और अपने पति की लंबी उम्र की कामना करने के बाद महिलाएं जल ग्रहण करके उपवास पूरा करती हैं।
करवा चौथ का व्रत खोलने की विधि
करवा चौथ का उपवास पूरा करने के लिए चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य देने की परंपरा निभाई जाती है। इसके लिए निम्नलिखित विधि अपना सकती हैं:
चंद्र दर्शन करें: चांद निकलने पर स्वच्छ स्थान पर खड़े होकर चंद्र देव के दर्शन करें।
अर्घ्य अर्पित करें: एक लोटे में जल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें और पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
छलनी से दर्शन करें: प्रचलित परंपरा के अनुसार, छलनी से पहले चंद्रमा और फिर अपने पति का चेहरा देखें।
पति के हाथों जल ग्रहण करें: चंद्र पूजा पूरी होने के बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलें।
भोजन करें: उपवास पूरा करने के बाद अपनी सुविधा और भूख के अनुसार भोजन ग्रहण करें।
करवा चौथ का व्रत खोलते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर आसमान में बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो अपने परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय करें। जरूरत पड़ने पर किसी विश्वसनीय पंडित से मार्गदर्शन लिया जा सकता है।
इसके अलावा, व्रत के दौरान स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि चक्कर आने, अत्यधिक कमजोरी या दूसरी परेशानी का अनुभव हो, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें। गर्भवती महिलाओं, मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों और नियमित दवाएं लेने वालों को निर्जला उपवास रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
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