Ashadha Purnima ज्योतिष न्यूज़ : आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई, बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने के साथ स्नान और दान का विशेष महत्व माना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम 6 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 29 जुलाई की रात 8 बजकर 05 मिनट तक रहेगी। इस अवसर पर श्रद्धालु व्रत रखते हैं और माता लक्ष्मी के साथ चंद्र देव की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को धन संबंधी परेशानियां हैं, आय के साधन नहीं बन रहे या आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है, जिससे धन-संपत्ति और समृद्धि में बढ़ोतरी के योग बनते हैं।
आषाढ़ पूर्णिमा पर धन उपाय का शुभ समय
इस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में धन से जुड़े उपाय करना फलदायी माना जाता है। प्रदोष काल की शुरुआत शाम 7 बजकर 21 मिनट के बाद से होगी। वहीं, मंत्र सिद्धि के लिए निशिता काल का विशेष महत्व है, जो रात 12 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर 30 जुलाई की रात 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस दिन प्रीति और आयुष्मान योग का भी संयोग बन रहा है, जो शुभ फल देने वाला माना जाता है।
आषाढ़ पूर्णिमा पर धन प्राप्ति के उपाय
धन लाभ के लिए इस दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और कुबेर देव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से प्राप्त धन में स्थिरता आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
सूर्यास्त के बाद जब अंधेरा होने लगे, तब घी का दीपक जलाकर उसे घर के मंदिर में सभी देवी-देवताओं को अर्पित करें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाकर उसी दीपक को वहां स्थापित करें। ध्यान रखें कि दीपक जलते समय मुख्य द्वार खुला रहे। साथ ही प्रदोष काल में घर में झाड़ू लगाने से बचना चाहिए।
पूजा के पश्चात कमलगट्टे की माला से महालक्ष्मी मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है। “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मयै नमः” इस मंत्र का नियमित जाप धन वृद्धि में सहायक माना जाता है। इसके अलावा “ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः” या “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप भी किया जा सकता है। इन मंत्रों का जाप निशिता काल में करने से विशेष फल मिलता है।
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करना भी उत्तम माना गया है। पूजा के दौरान कमल का फूल अर्पित करना शुभ फल देता है और दांपत्य जीवन में भी मधुरता बनी रहती है।
इसके अतिरिक्त, आषाढ़ पूर्णिमा की शाम को चांदी की कछुए के आकार वाली अंगूठी दाएं हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करना भी शुभ माना जाता है। कछुए को भगवान विष्णु के कूर्म अवतार का प्रतीक माना जाता है, जिसे धारण करने से जीवन में सुख, संपन्नता और स्थिरता आने की मान्यता है।