Aaj Ka Panchang : आज का पंचांग, 9 अगस्त 2026

Update: 2026-08-09 00:54 GMT

शक संवत 1948, श्रावण, कृष्ण, एकादशी, रविवार, विक्रम संवत् 2083। तदनुसार अंग्रेजी तारीख 09 अगस्त सन् 2026 ई॰। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। राहुकाल शाम 05 बजकर 26 मिनट से शाम 07 बजकर 06 मिनट तक। एकादशी तिथि प्रातः 11 बजकर 04 मिनट तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ।

मृगशिरा नक्षत्र दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक उपरांत आर्द्रा नक्षत्र का आरंभ। हर्षण योग अगले दिन तड़के 02 बजकर 04 मिनट (10 अगस्त) तक उपरांत वज्र योग का आरंभ। बालव करण प्रातः 11 बजकर 04 मिनट तक उपरांत कौलव करण का आरंभ। चन्द्रमा दिन रात मिथुन राशि पर संचार करेगा।

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 05:47 बजे

सूर्यास्त का समय: सायं 07:06 बजे

चंद्रोदय का समय: रात 02:45 बजे (10 अगस्त)

चंद्रास्त का समय: सायं 04:20 बजे (10 अगस्त)

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: कर्क राशि में स्थित हैं

चन्द्र देव: मिथुन राशि में स्थित हैं

आज का शुभ मुहूर्त 09 अगस्त 2026 :

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

अमृत काल : प्रातः 06 बजकर 42 मिनट से प्रातः 08 बजकर 09 मिनट तक तथा अगले दिन तड़के 03 बजकर 23 मिनट से 04 बजकर 50 मिनट (10 अगस्त) तक रहेगा।

आज का चौघड़िया मुहूर्त 09 अगस्त 2026 :

SIR in Jharkhand: वोटर लिस्ट के प्रारूप का 5 अगस्त को होगा प्रकाशन, ASDD सूची की मिलेगी जानकारी

उद्वेग (सामान्य) : सुबह 05 बजकर 47 मिनट से 07 बजकर 27 मिनट तक।

चर (सामान्य) : सुबह 07 बजकर 27 मिनट से 09 बजकर 07 मिनट तक।

लाभ (उन्नति) : सुबह 09 बजकर 07 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक।

अमृत (सर्वोत्तम) : सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त 09 अगस्त 2026 :

राहुकाल : सायं 05 बजकर 26 मिनट से सायं 07 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।

गुलिक काल : दोपहर 03 बजकर 46 मिनट से सायं 05 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।

यमगंड : दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से दोपहर 02 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।

कामिका एकादशी 2026

एकादशी तिथि प्रारंभ: 08 अगस्त, दोपहर 01:59 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 09 अगस्त, सुबह 11:04 बजे

व्रत पारण समय: 10 अगस्त, सुबह 05:47 से 08:00 बजे तक

आज का उपाय : आज रविवार के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करें, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें और तांबे के बर्तन का दान करें।

 

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