करवा की टोंटी में क्यों लगाई जाती हैं सींकें? जानिए इससे जुड़ी लोकमान्यता
करवा चौथ की पूजा में सींकों का क्या है महत्व
धर्म डेस्क: करवा चौथ की पूजा में करवा, दीपक और छलनी के साथ कुछ परिवारों में सींकों का भी उपयोग किया जाता है। करवे की टोंटी में सींकें लगाने की परंपरा लोककथाओं और पारिवारिक रीति-रिवाजों से जुड़ी है। इसे किसी एक सार्वभौमिक नियम या प्रमाणित ‘रहस्य’ के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और सामग्री में अंतर मिलता है।
एक प्रचलित लोककथा में सींकों का संबंध करवा माता से बताया गया है। कथा के अनुसार, करवा माता ने अपने पति की रक्षा के लिए चित्रगुप्त के मृत्यु लेख से उनकी मृत्यु का समय सींक की सहायता से मिटा दिया था। इसी कथा के आधार पर सींकों को पति की दीर्घायु की कामना और रक्षा के प्रतीक से जोड़ा जाता है। यह धार्मिक लोकमान्यता है, ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित घटना नहीं।
कुछ प्रचलित पूजा विधियों में करवे की टोंटी पर सात सींकें लगाई जाती हैं। हालांकि सींकों की संख्या और उन्हें रखने का तरीका हर परिवार में समान नहीं होता। इसलिए किसी विशेष संख्या को सभी व्रत रखने वालों के लिए अनिवार्य बताने के बजाय स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए।
करवे की टोंटी की एक प्रतीकात्मक व्याख्या भगवान गणेश की सूंड के रूप में भी की जाती है। धार्मिक लेखों में करवा चौथ की पूजा सामग्री के अलग-अलग प्रतीकात्मक अर्थ बताए गए हैं। ये आस्था से जुड़ी व्याख्याएं हैं और इन्हें उसी रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।