मुंबई : बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की हेल्थ कमिटी के चेयरमैन हरीश भंडिरगे ने शुक्रवार देर रात परेल स्थित प्रतिष्ठित किंग एडवर्ड मेमोरियल (KEM) अस्पताल का अचानक निरीक्षण किया। खास बात यह रही कि वह मरीजों को मिलने वाली वास्तविक सुविधाओं और अस्पताल की व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने के लिए भेष बदलकर अस्पताल पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने इमरजेंसी विभाग में कई गंभीर खामियां मिलने का दावा किया, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन को जांच के निर्देश दिए गए हैं।

हरीश भंडिरगे के अनुसार, आधी रात के समय किए गए इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य अस्पताल में रात के समय मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना था। उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल पहुंचकर इमरजेंसी विभाग की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी विभाग में मरीजों की देखभाल को लेकर कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। इनमें इलाज शुरू होने में देरी, ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की अनुपस्थिति और मरीजों एवं उनके परिजनों के साथ उचित संवाद की कमी जैसी समस्याएं शामिल थीं।

भंडिरगे ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीज अक्सर गंभीर परिस्थितियों में पहुंचते हैं और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है। ऐसे में इलाज में देरी या स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

उन्होंने निरीक्षण के बाद अस्पताल प्रशासन को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि जांच में जो भी कर्मचारी या अधिकारी जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।

BMC हेल्थ कमिटी चेयरमैन के इस औचक दौरे के बाद KEM अस्पताल के कुछ कर्मचारियों में नाराजगी भी देखने को मिली है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूरी स्थिति जाने सीधे तौर पर आरोप लगाना उचित नहीं है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक कर्मचारियों की आपत्तियों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

KEM अस्पताल मुंबई के सबसे बड़े और प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक है। यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में गंभीर बीमारियों, दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों से जुड़े मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे में इमरजेंसी विभाग की कार्यप्रणाली बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर BMC समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करती रहती है। अधिकारियों का कहना है कि मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भंडिरगे ने कहा कि औचक निरीक्षण का उद्देश्य किसी कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को समझना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर कमी है तो उसे दूर करना जरूरी है, ताकि आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

इस घटना के बाद KEM अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। मरीजों के इलाज में देरी और डॉक्टरों की उपलब्धता जैसे मुद्दे लंबे समय से सरकारी अस्पतालों में चिंता का विषय रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पर्याप्त स्टाफ, स्पष्ट जिम्मेदारी और नियमित निगरानी जरूरी है।

अस्पताल प्रशासन अब निरीक्षण के दौरान उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा करेगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन कारणों से ऐसी स्थिति बनी।

BMC की ओर से कहा गया है कि शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।

फिलहाल KEM अस्पताल में हुई इस औचक जांच के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर है। यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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