अमृतसर। पंजाब के अमृतसर जिले के बाल सिकंदर गांव के रहने वाले वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने अपनी मेहनत, संघर्ष और मजबूत इरादों के दम पर कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। पुरुषों की वेटलिफ्टिंग की +110 किलोग्राम ओपन कैटेगरी में उतरे लवप्रीत सिंह स्वर्ण पदक जीतने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन अंतिम प्रयास में महज एक किलो के अंतर से चूक गए। हालांकि, उनके प्रदर्शन ने उन्हें प्रतियोगिता के सबसे मजबूत खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।
28 वर्षीय लवप्रीत सिंह की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल है। एक साधारण परिवार से आने वाले लवप्रीत के पिता दर्जी का काम करते हैं, जबकि उनके दादा सब्जी बेचते थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने खेल को अपना जुनून बनाया और लगातार मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।
लवप्रीत की कद-काठी और ताकत देखकर उन्हें देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि उनका बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा। कभी अभावों का सामना करने वाले इस खिलाड़ी ने अपनी मेहनत से खुद को दुनिया के मजबूत वेटलिफ्टरों में शामिल कर लिया है। उन्होंने साबित किया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से सफलता हासिल की जा सकती है।
गुरुवार रात हुए मुकाबले में लवप्रीत सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया। वह प्रतियोगिता के आखिरी दौर तक स्वर्ण पदक की दौड़ में बने रहे। उन्होंने अपने प्रयासों से कुल भार में बढ़त बनाई और एक समय ऐसा लग रहा था कि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।
मुकाबले के दौरान लवप्रीत ने 217 किलोग्राम के अंतिम क्लीन एंड जर्क प्रयास का चयन किया। यदि वह इस भार को सफलतापूर्वक उठा लेते तो उनका कुल स्कोर उन्हें शीर्ष स्थान पर पहुंचा सकता था। हालांकि, इस प्रयास में वह लड़खड़ा गए और वजन नहीं उठा पाए। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।
उस समय लवप्रीत सिंह कुल 388 किलोग्राम के भार के साथ आगे चल रहे थे, जबकि न्यूजीलैंड के डेविड एंड्रयू लिटी 383 किलोग्राम के साथ उनके पीछे थे। लवप्रीत के पास पांच किलो की बढ़त थी और प्रतियोगिता बेहद रोमांचक स्थिति में पहुंच गई थी। अंतिम प्रयास में मिली असफलता के बाद मुकाबले का परिणाम बदल गया।
लवप्रीत का सफर भारतीय खेल जगत में प्रेरणा देने वाला है। उन्होंने अपने करियर में कई चुनौतियों का सामना किया और लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया। एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके समर्पण और अनुशासन को दर्शाता है।
भारतीय नौसेना में कार्यरत लवप्रीत ने खेल के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी बखूबी निभाया है। नौसेना में सेवा करते हुए उन्होंने वेटलिफ्टिंग में अपनी प्रतिभा को निखारा और देश के लिए गौरव हासिल करने का प्रयास जारी रखा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि लवप्रीत सिंह की ताकत, तकनीक और मानसिक मजबूती उन्हें भविष्य के बड़े प्रतियोगिताओं के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है। जिस तरह उन्होंने दबाव भरे मुकाबले में प्रदर्शन किया, वह उनकी क्षमता को दर्शाता है।
लवप्रीत सिंह की कहानी केवल एक पदक से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की कहानी है। गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को छोड़ा नहीं और लगातार मेहनत करते रहे। आज वह युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
हालांकि वह कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक से थोड़ा पीछे रह गए, लेकिन उनके प्रदर्शन ने देशवासियों का दिल जीत लिया है। एक किलो के मामूली अंतर से पदक चूकना उनके शानदार प्रयास को कम नहीं करता।
लवप्रीत सिंह ने यह दिखा दिया कि खेल में सफलता केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से भी हासिल की जा सकती है। आने वाले समय में उनसे भारतीय वेटलिफ्टिंग को और बड़ी उम्मीदें हैं। उनका लक्ष्य अब भविष्य की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतना होगा।