SPORT: क्रिकेट जगत के लिए शुक्रवार रात एक बेहद दुखद खबर सामने आई। वेस्टइंडीज के महान ऑलराउंडर और क्रिकेट इतिहास के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल सर गारफील्ड सोबर्स का 89 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों और पूर्व खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है। सोबर्स को क्रिकेट इतिहास के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में गिना जाता था और उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से खेल की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी।
गारफील्ड सोबर्स का जन्म 28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में हुआ था। बचपन से ही उन्हें क्रिकेट के प्रति गहरी रुचि थी। उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बहुत कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा और देखते ही देखते विश्व क्रिकेट के सबसे बड़े सितारों में शामिल हो गए। उनकी बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों ही क्षमताएं उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती थीं।
सोबर्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वेस्टइंडीज का प्रतिनिधित्व करते हुए 93 टेस्ट मैच खेले। इसके अलावा उन्होंने एक वनडे मुकाबले में भी हिस्सा लिया। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 8 हजार से ज्यादा रन बनाए और 200 से अधिक विकेट हासिल किए। उनकी ऑलराउंड क्षमता ने उन्हें क्रिकेट इतिहास में एक खास स्थान दिलाया।
बल्लेबाजी में सोबर्स की तकनीक और आक्रामक शैली का हर कोई कायल था। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी बड़ी पारियां खेलने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कई बार अपनी टीम को संकट से बाहर निकाला और यादगार जीत दिलाई। उनकी बल्लेबाजी में क्लास और आत्मविश्वास साफ नजर आता था।
गेंदबाजी में भी सोबर्स बेहद प्रभावशाली थे। वह तेज गेंदबाजी के साथ-साथ स्पिन गेंदबाजी करने में भी सक्षम थे। यही वजह थी कि उन्हें क्रिकेट का संपूर्ण खिलाड़ी कहा जाता था। वह किसी भी परिस्थिति में टीम के लिए उपयोगी साबित होते थे। उनकी फील्डिंग भी शानदार थी और मैदान पर उनकी चुस्ती देखते ही बनती थी।
गारफील्ड सोबर्स का नाम क्रिकेट के कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जुड़ा हुआ है। साल 1968 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाने का कारनामा किया था, जिसे आज भी क्रिकेट इतिहास की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। उनकी यह उपलब्धि लंबे समय तक क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय रही।
सोबर्स को उनके योगदान के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्हें क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों में शामिल किया गया और दुनिया भर में उनका सम्मान हुआ। वर्ष 1975 में उन्हें नाइटहुड की उपाधि दी गई, जिसके बाद वह सर गारफील्ड सोबर्स कहलाए। क्रिकेट के प्रति उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
उनके निधन के बाद क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके शानदार करियर को याद किया। खिलाड़ियों ने कहा कि सोबर्स सिर्फ एक महान क्रिकेटर ही नहीं बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी थे। उनके खेल ने आने वाले कई खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया।
गारफील्ड सोबर्स का जाना क्रिकेट के एक स्वर्णिम युग के अंत जैसा है। उन्होंने जिस अंदाज में क्रिकेट खेला और जिस तरह खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, वह हमेशा याद किया जाएगा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेगी। क्रिकेट इतिहास में उनका नाम हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।