नई दिल्ली: बुधवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट में कहा गया है कि किसी डिवाइस के यूनिक मोबाइल डिवाइस इक्विपमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर या इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (IMEI) को जानबूझकर हटाना, मिटाना या बदलना गैर-कानूनी है
बयान में कहा गया है कि ऐसे हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना, बनाना, उसकी तस्करी करना, उसे अपने पास रखना या कंट्रोल करना भी गैर-कानूनी है, जिसे ऊपर बताए गए तरीके से कॉन्फ़िगर किया गया हो। साथ ही, नागरिक अपने मोबाइल हैंडसेट को वेरिफाई और सुरक्षित करने के लिए 'संचार साथी' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह प्लेटफॉर्म यूज़र्स को डिवाइस की IMEI डिटेल्स (जैसे ब्रांड, मॉडल और मैन्युफैक्चरर) को वेरिफाई करने की सुविधा देता है, जिससे डिवाइस की असलियत और सुरक्षा को मज़बूत करने में मदद मिलती है।
IMEI से छेड़छाड़ से जुड़े उल्लंघनों के लिए तीन साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। साथ ही, एक्ट की धारा 42(7) के तहत ऐसे अपराध कॉग्निज़ेबल (पुलिस बिना वारंट के गिरफ़्तार कर सकती है) और नॉन-बेलेबल (ज़मानत नहीं मिलती) होते हैं।
इसके अलावा, नकली दस्तावेज़ों, धोखाधड़ी, जालसाज़ी या किसी और का रूप धरकर सिम कार्ड हासिल करना भी सज़ा-योग्य अपराध है। अपने नाम पर लिए गए सिम कार्ड को दूसरों को ट्रांसफर करना, बेचना या सौंपना (जो उनका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं) और कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी (CLI) या अन्य टेलीकम्युनिकेशन आइडेंटिफ़ायर को बदलने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल करना भी भारतीय कानून के तहत अपराध है।
नागरिकों को मोबाइल डिवाइस हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदने चाहिए और IMEI डिटेल्स को वेरिफाई करना चाहिए।
बयान में कहा गया है, "हैंडसेट को सुरक्षित रखने के लिए मज़बूत पासवर्ड, PIN या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। IMEI से छेड़छाड़ या अन्य गलत गतिविधियों के जोखिम को कम करने के लिए डिवाइस को केवल अधिकृत सर्विस सेंटर पर ही ठीक करवाएं।"
डिवाइस खोने या चोरी होने पर, तुरंत स्थानीय पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराएं और शिकायत की कॉपी ले लें।
पीड़ित अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से खोए हुए मोबाइल नंबर के लिए डुप्लीकेट सिम कार्ड भी ले सकते हैं। TRAI के नियमों के तहत, दोबारा जारी किए गए सिम के एक्टिवेशन के पहले 24 घंटों के लिए SMS सेवाओं पर रोक होती है। चूंकि 'संचार साथी' के लिए मोबाइल OTP वेरिफिकेशन की ज़रूरत होती है, इसलिए पीड़ितों को अपनी रिक्वेस्ट सबमिट करने के लिए एक्टिवेशन के बाद 24 घंटे इंतज़ार करना होगा। बयान में कहा गया है, “ब्लॉकिंग का अनुरोध करने के लिए संचार साथी (CEIR) पोर्टल या मोबाइल ऐप पर रजिस्टर करें और एक यूनिक रिक्वेस्ट ID पाने के लिए पुलिस रिपोर्ट और वैलिड ID प्रूफ अपलोड करें। अगर बाद में आपका डिवाइस मिल जाता है, तो पहले स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दें और फिर हैंडसेट को सुरक्षित रूप से अनब्लॉक करने के लिए पोर्टल पर अपनी रिक्वेस्ट ID का इस्तेमाल करें।”
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