नई दिल्ली: जापानी कार कंपनी सुज़ुकी मोटर ने शुक्रवार को कहा कि वह 2030 तक गाड़ियों को बनाने में लगने वाले समय को आधा करने और भारत में प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। यह नए मॉडल लॉन्च करने की गति बढ़ाने और दुनिया भर में अपनी मैन्युफैक्चरिंग पहुंच को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा है।
सुज़ुकी मोटर कॉर्पोरेशन के प्रेसिडेंट तोशिहिरो सुज़ुकी ने कहा कि कंपनी फाइनेंशियल ईयर 2020 के लेवल से डेवलपमेंट की क्षमता में 30% का सुधार करेगी और हरियाणा के मानेसर प्लांट में फैक्ट्री की प्रोडक्टिविटी को स्टैंडर्ड लेवल से 50% तक बढ़ाएगी।
सुज़ुकी ने कहा कि वह सिर्फ़ बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (BEV) पर निर्भर रहने के बजाय मल्टी-पावरट्रेन स्ट्रैटेजी अपनाएगी।
उन्होंने जापान और भारत को अपने ग्लोबल बिजनेस की नींव के मुख्य केंद्र बताया और कहा कि जापान में विकसित टेक्नोलॉजी को मारुति सुज़ुकी इंडिया के साथ शेयर किया जाएगा और अलग-अलग मार्केट के हिसाब से उनमें बदलाव किए जाएंगे।
तोशिहिरो सुज़ुकी ने कहा, "टेक्नोलॉजी शेयर की जाती है। प्रोडक्ट्स को रीजनल ज़रूरतों के हिसाब से ऑप्टिमाइज़ किया जाता है। यही हमारी सोच है और इसी तरह सुज़ुकी मुकाबला करती है।" उन्होंने फाइनेंशियल ईयर 2030 तक भारत में सालाना 40 लाख (4 मिलियन) गाड़ियां बनाने की क्षमता का लक्ष्य भी बताया, जो अभी 29 लाख (2.9 मिलियन) यूनिट्स है।
हाल ही में गुजरात के हंसलपुर में चौथी प्रोडक्शन लाइन शुरू होने से मौजूदा सालाना प्रोडक्शन क्षमता बढ़कर 10 लाख (1 मिलियन) यूनिट्स हो गई है।
सुज़ुकी गुरुग्राम, मानेसर और खरखोदा में भी प्लांट चलाती है और साणंद में एक नई साइट बनाने की योजना है।
सुज़ुकी गाड़ियों के मामले में प्लानिंग, डिज़ाइन, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, क्वालिटी और प्रोक्योरमेंट जैसे कामों को एक के बाद एक करने के बजाय एक साथ करने की योजना बना रही है।
कंपनी डिजिटल इंजीनियरिंग को और बेहतर बनाने और मॉड्यूलरिटी को बढ़ाने की भी योजना बना रही है, ताकि अलग-अलग प्रोडक्ट्स में मॉड्यूल्स का इस्तेमाल किया जा सके और डेवलपमेंट व मैन्युफैक्चरिंग को और करीब से जोड़ा जा सके।
कार कंपनी का कहना है कि बिजली उत्पादन, रिन्यूएबल एनर्जी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्यूल की उपलब्धता और सरकारी नीतियों में अंतर के कारण सभी मार्केट में एक ही तरह की प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना मुश्किल है।
इसलिए, वह इंटरनल-कंबशन-इंजन, कंप्रेस्ड नेचुरल गैस, फ्लेक्स-फ्यूल और कार्बन-न्यूट्रल-फ्यूल टेक्नोलॉजी के साथ-साथ BEV और हाइब्रिड गाड़ियां भी बनाती रहेगी।
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