23 साल का सैन्य सफर खत्म, इराक छोड़ेगा अमेरिका

Update: 2026-07-15 12:22 GMT

वॉशिंगटन। अमेरिका ने इराक से अपनी सैन्य मौजूदगी खत्म करने का फैसला किया है। अमेरिकी सेना 30 सितंबर तक इराक से पूरी तरह हट जाएगी। करीब 23 साल पहले वर्ष 2003 में सद्दाम हुसैन की सरकार के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका ने इराक में अपनी सेना तैनात की थी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ बैठक के दौरान कहा कि अब इराक में अमेरिकी सेना की जरूरत नहीं लगती। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने सेना वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का संकेत दिया।

पेंटागन ने भी एक बयान जारी कर बताया कि अमेरिका इराक के साथ हुए 2024 के समझौते के तहत आइसिस (ISIS) आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अभियान की जिम्मेदारी अब धीरे-धीरे इराकी सुरक्षा बलों को सौंपी जा रही है।

अमेरिकी सेना ने पिछले कई वर्षों में इराकी सैनिकों को प्रशिक्षण दिया है ताकि वे आतंकवादी संगठनों से मुकाबला करने में सक्षम हो सकें। अब अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं की भूमिका कम की जा रही है और इराकी सेना को सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी दी जा रही है।

अमेरिका की इराक में सैन्य मौजूदगी की शुरुआत मार्च 2003 में हुई थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के नेतृत्व में अमेरिका ने इराक पर हमला किया था। इस कार्रवाई का मुख्य कारण यह दावा था कि इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पास बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियार मौजूद हैं। हालांकि बाद में ये दावे गलत साबित हुए।

सद्दाम हुसैन की सरकार गिरने के बाद भी अमेरिकी सेना लंबे समय तक इराक में बनी रही। वर्ष 2011 में अमेरिका ने बड़ी संख्या में सैनिकों को वापस बुलाया था, लेकिन 2014 में आइसिस के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बाद अमेरिकी सेना फिर से इराक में सक्रिय हुई।

आइसिस ने इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था और अपनी गतिविधियों से पूरी दुनिया में चिंता पैदा कर दी थी। इसके खिलाफ अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के साथ मिलकर सैन्य अभियान शुरू किया। इस अभियान का उद्देश्य इराकी सेना को मजबूत करना और आइसिस के प्रभाव को खत्म करना था।

समय के साथ इराकी सुरक्षा बलों ने अपनी क्षमता बढ़ाई और आतंकवादी संगठन के खिलाफ कार्रवाई तेज की। अब अमेरिका का मानना है कि इराकी सेना देश की सुरक्षा संभालने में सक्षम है।

अमेरिकी सेना की वापसी को दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अमेरिका ने साफ किया है कि वह इराक के साथ सुरक्षा सहयोग और सलाहकार स्तर पर संबंध बनाए रख सकता है।

23 साल के लंबे सैन्य अभियान के बाद अमेरिकी सैनिकों का इराक से जाना मध्य पूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। इससे क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य भूमिका में बदलाव दिखाई देगा और इराक अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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