दुनिया के लिए चेतावनी, HIV महामारी फिर पकड़ सकती है रफ्तार

Update: 2026-07-28 10:42 GMT

ब्रासीलिया/जिनेवा :  दुनिया भर में एचआईवी और एड्स से लड़ाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएड्स ने एक चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता में भारी गिरावट आई है, जिससे आने वाले समय में एचआईवी महामारी के दोबारा तेजी से फैलने का खतरा बढ़ सकता है।

यूएनएड्स की ओर से सोमवार को जारी 60 पन्नों की रिपोर्ट में वैश्विक समुदाय को चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते वित्तीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत नहीं किया गया तो पिछले कई दशकों में एचआईवी नियंत्रण को लेकर हासिल की गई उपलब्धियां प्रभावित हो सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में एचआईवी संक्रमण की रोकथाम और इससे जुड़े कार्यक्रमों के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में करीब 18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके बाद यह सहायता घटकर 7.3 अरब डॉलर रह गई है, जो लगभग दो दशकों का सबसे निचला स्तर है। एजेंसी ने कहा कि आर्थिक संसाधनों की कमी का सीधा असर एचआईवी जांच, इलाज, दवाओं की उपलब्धता और संक्रमण रोकने वाले कार्यक्रमों पर पड़ सकता है।

यूएनएड्स ने बताया कि पिछले वर्षों में लगातार प्रयासों के कारण दुनिया में एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आई थी। बेहतर इलाज, एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की उपलब्धता और जागरूकता अभियानों की वजह से लाखों लोगों को जीवन बचाने में मदद मिली। लेकिन अब फंडिंग में कमी आने से इन प्रयासों की गति धीमी पड़ने की आशंका है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एचआईवी जैसी बीमारी से निपटने के लिए लंबे समय तक लगातार निवेश की जरूरत होती है। यदि रोकथाम कार्यक्रमों में कमी आती है तो नए संक्रमणों की संख्या बढ़ सकती है। साथ ही, जिन लोगों को नियमित इलाज और दवाओं की आवश्यकता होती है, उनके लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक ने वैश्विक नेताओं से अपील की है कि एचआईवी नियंत्रण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को कमजोर न होने दें। उन्होंने कहा कि यह समय पीछे हटने का नहीं बल्कि उन प्रयासों को और मजबूत करने का है, जिनसे दुनिया ने इस बीमारी पर नियंत्रण पाने में प्रगति हासिल की है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आर्थिक चुनौतियों, स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलती प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय सहायता में कमी के कारण कई देशों में एचआईवी से जुड़े कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। खासतौर पर कम और मध्यम आय वाले देशों में इसका असर अधिक देखने को मिल सकता है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बाहरी सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एचआईवी संक्रमण आज भी दुनिया के सामने एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हालांकि, आधुनिक चिकित्सा और जागरूकता के कारण इसके इलाज और नियंत्रण में काफी सुधार हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, सुरक्षित व्यवहार, दवाओं की नियमित उपलब्धता और जागरूकता अभियान संक्रमण को रोकने में अहम भूमिका निभाते हैं।

यूएनएड्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर वैश्विक स्तर पर निवेश और सहयोग कम होता रहा तो एचआईवी के खिलाफ दशकों से चली आ रही लड़ाई को नुकसान पहुंच सकता है। एजेंसी ने सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और स्वास्थ्य संस्थाओं से मिलकर काम करने की अपील की है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एचआईवी महामारी को नियंत्रित करने के लिए केवल दवाओं और इलाज पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना, भेदभाव खत्म करना और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी जरूरी है।

यूएनएड्स की चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया कई स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। एजेंसी का कहना है कि यदि अभी उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करना और अधिक कठिन हो सकता है।

इस रिपोर्ट ने वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय को एक बार फिर याद दिलाया है कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में लगातार प्रयास और पर्याप्त संसाधन बेहद जरूरी हैं। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वित्तीय समर्थन यह तय करेगा कि दुनिया इस महामारी पर नियंत्रण बनाए रख पाती है या नहीं।

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