विदेशी छात्रों के वीजा पर रोक न लगे, अमेरिकी संसद से अपील

Update: 2026-07-20 14:21 GMT

वाशिंगटन। अमेरिका में विदेशी छात्रों और शैक्षणिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के तहत आने वाले लोगों के लिए प्रस्तावित नई चार वर्षीय वीजा सीमा को लेकर विरोध शुरू हो गया है। भारतीय मूल के लोगों के हितों के लिए काम करने वाले संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने अमेरिकी संसद और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) से इस नियम के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह नीति अमेरिका की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है और उच्च शिक्षा व शोध के मौजूदा ढांचे से मेल नहीं खाती।

FIIDS के नीति और रणनीति प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा कि विदेशी छात्रों के लिए चार वर्ष की वीजा सीमा लागू करना अमेरिका के हित में नहीं होगा। उन्होंने इसे ऐसा कदम बताया जो देश की शिक्षा व्यवस्था, शोध क्षेत्र और नवाचार क्षमता को प्रभावित कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी प्रशासन ने विदेशी छात्रों, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों के प्रतिभागियों तथा पत्रकारों के वीजा नियमों को पहले से अधिक सख्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं।

चार साल की सीमा पर FIIDS ने जताई चिंता

FIIDS का कहना है कि अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए चार वर्ष की अवधि कई छात्रों के लिए पर्याप्त नहीं है। संगठन के अनुसार, आज के समय में कई विदेशी छात्र स्नातक, मास्टर और पीएचडी जैसी डिग्रियों के लिए अमेरिका आते हैं, लेकिन इन पाठ्यक्रमों को पूरा करने में अक्सर निर्धारित समय से अधिक समय लग जाता है।

खंडेराव कंद ने कहा कि औसतन स्नातक की पढ़ाई पूरी करने में करीब 52 महीने लगते हैं, जबकि पीएचडी कार्यक्रमों को पूरा करने में लगभग 5.7 वर्ष का समय लग सकता है। ऐसे में केवल चार वर्ष की वीजा सीमा तय करना छात्रों के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकता है।

उन्होंने आशंका जताई कि नए नियमों के कारण कई छात्रों को अपनी पढ़ाई या शोध कार्य अधूरा छोड़ना पड़ सकता है। इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

शोध और नवाचार पर असर की आशंका

FIIDS ने कहा कि विदेशी छात्र लंबे समय से अमेरिका की शिक्षा और शोध व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। दुनिया भर से प्रतिभाशाली छात्र अमेरिका के विश्वविद्यालयों में पढ़ने और शोध करने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या भारतीय छात्रों की भी होती है।

संगठन का तर्क है कि यदि वीजा नियम अधिक सख्त किए गए तो अमेरिका की प्रयोगशालाओं और शोध संस्थानों को प्रतिभाशाली छात्रों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। इससे अमेरिका की तकनीकी प्रगति और नवाचार क्षमता प्रभावित हो सकती है।

FIIDS ने चेतावनी दी कि यदि विदेशी छात्रों के लिए अवसर सीमित किए गए तो कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अमेरिका की जगह अन्य देशों का रुख कर सकते हैं। इससे अमेरिका को शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ सकता है।

USCIS में लंबित हैं लाखों आवेदन

FIIDS ने USCIS की कार्यप्रणाली को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन के अनुसार, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा के पास पहले से ही बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। ऐसे में नई वीजा सीमा लागू होने से छात्रों को प्रशासनिक देरी और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

संगठन का कहना है कि यदि छात्रों के वीजा विस्तार या अन्य आव्रजन प्रक्रियाओं में देरी होती है तो कई विद्यार्थियों की पढ़ाई, शोध परियोजनाएं और करियर योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

FIIDS ने अमेरिकी नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे इस फैसले पर दोबारा विचार करें और ऐसा नियम तैयार करें जो छात्रों, विश्वविद्यालयों और अमेरिका के दीर्घकालिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखे।

भारतीय छात्रों पर पड़ सकता है असर

अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए दुनिया के सबसे लोकप्रिय शिक्षा केंद्रों में से एक है। हर साल बड़ी संख्या में भारतीय विद्यार्थी अमेरिका के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा और शोध के लिए जाते हैं। ऐसे में वीजा अवधि में बदलाव का सीधा असर भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है।

FIIDS का कहना है कि विदेशी छात्रों को केवल प्रवासी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें अमेरिका की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और तकनीकी विकास में योगदान देने वाले समूह के रूप में समझना चाहिए।

संगठन ने अमेरिकी संसद और USCIS से आग्रह किया है कि नई चार वर्षीय वीजा सीमा लागू करने से पहले इसके व्यापक प्रभावों का अध्ययन किया जाए। FIIDS के अनुसार, अमेरिका की ताकत उसकी प्रतिभा को आकर्षित करने की क्षमता में रही है और ऐसी नीतियां नहीं बननी चाहिए जिससे दुनिया भर के प्रतिभाशाली छात्र दूसरे देशों की ओर जाने लगें।

फिलहाल विदेशी छात्रों के लिए प्रस्तावित वीजा सीमा को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रशासन इस मांग पर क्या कदम उठाता है और क्या इस नीति में कोई बदलाव किया जाता है।

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