पाकिस्तान में जबरन शादी और धार्मिक उत्पीड़न के मामले रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किया है कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कई कानूनी कदम उठाए जाने के बावजूद देश में धार्मिक स्वतंत्रता का लगातार उल्लंघन हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा कानूनों का दुरुपयोग, जबरन धर्म परिवर्तन, जबरन विवाह, धार्मिक उत्पीड़न और संस्थागत भेदभाव जैसी समस्याएं अल्पसंख्यक समुदायों के समान नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं।मानवाधिकार आयोग ने 15 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी सातवीं वार्षिक रिपोर्ट 'सेंक्चुअरी डिनाइड: फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ इन 2025/26' में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून बनाने और उन्हें प्रभावी तरीके से लागू करने के बीच अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है।
कानून बनने के बाद भी नहीं हुआ अल्पसंख्यक आयोग का गठन
HRCP ने अपनी रिपोर्ट में 'नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज एक्ट 2025' पारित किए जाने का स्वागत किया है। इस कानून का उद्देश्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत करना है।हालांकि, आयोग ने इस बात पर चिंता जताई कि कानून पारित होने के कई महीने बाद भी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन नहीं किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने से अल्पसंख्यकों की शिकायतों और अधिकारों से जुड़े मामलों के समाधान में चुनौतियां बनी हुई हैं।
ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल
मानवाधिकार आयोग ने पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के कथित दुरुपयोग को गंभीर समस्या बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ईशनिंदा के आरोपों का सामना कर रहे सैकड़ों लोग कानूनी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।HRCP ने ऐसे संगठित नेटवर्क का भी उल्लेख किया है, जिन पर लोगों को ईशनिंदा के मामलों में फंसाने के आरोप लगे हैं। आयोग के मुताबिक, इन आरोपों से जुड़े व्यक्तियों की जांच अब तक नहीं हुई है।रिपोर्ट में ईशनिंदा के आरोपों के कारण कमजोर और संवेदनशील समुदायों के सामने उत्पन्न होने वाले खतरों पर भी चिंता व्यक्त की गई है।
हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन विवाह का मुद्दा
रिपोर्ट में पाकिस्तान के हिंदू और ईसाई समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन विवाह की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।HRCP के अनुसार, गरीबी और पुलिस की अपर्याप्त प्रतिक्रिया के कारण प्रभावित परिवारों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।हालांकि, आयोग ने पंजाब और बलूचिस्तान में विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करने वाले कानूनों को सकारात्मक कदम बताया है। इसके साथ ही बाल विवाह और जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए अधिक प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता जताई है।
अहमदिया समुदाय पर हमलों को लेकर चिंता
मानवाधिकार आयोग ने अहमदिया समुदाय के खिलाफ होने वाली हिंसा और सामाजिक भेदभाव का भी उल्लेख किया है।रिपोर्ट में चिनाब नगर में हुए दो चरमपंथी हमलों का जिक्र किया गया है। इसके अलावा समुदाय के लोगों को सार्वजनिक और व्यावसायिक जीवन से बाहर रखने के बढ़ते प्रयासों को लेकर चिंता जताई गई है।आयोग के अनुसार, धार्मिक स्वतंत्रता के साथ अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकारों की रक्षा भी जरूरी है।
शिक्षा और रोजगार में भेदभाव का आरोप
रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के सामने रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को भी उठाया गया है।HRCP ने रोजगार में भेदभावपूर्ण व्यवहार, स्कूली पाठ्यक्रमों के इस्लामीकरण और मुख्यधारा के मीडिया में अल्पसंख्यकों की चिंताओं को पर्याप्त स्थान नहीं मिलने को समान नागरिकता के लिए चुनौती बताया है।
पाकिस्तान सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
मानवाधिकार आयोग ने संघीय सरकार से राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का शीघ्र गठन करने, ईशनिंदा मामलों में लोगों को फंसाने वाले कथित नेटवर्क की जांच कराने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भड़काने वालों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।आयोग ने पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी अनिवार्य प्रशिक्षण तथा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों की प्रभावी सुरक्षा की भी सिफारिश की है।रिपोर्ट में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से भी सभी समुदायों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित करने वाला कानून बनाने की अपील की गई है।