गोरखा महोत्सव में सीएम धामी का बड़ा बयान, नेपाल से रिश्तों को बताया भावनात्मक
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गोरखा महोत्सव में भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्ते केवल दो पड़ोसी देशों के बीच औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें साझा इतिहास, संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक जुड़ाव में गहराई तक समाई हुई हैं। मुख्यमंत्री ने गोरखा समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह समुदाय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, वीरता, अनुशासन और देशभक्ति के लिए विशेष पहचान रखता है।गोरखा महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड और नेपाल के बीच सदियों पुराने संबंध हैं। दोनों क्षेत्रों के लोगों की जीवनशैली, धार्मिक मान्यताओं, त्योहारों और सामाजिक परंपराओं में अनेक समानताएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि यही सांस्कृतिक समानता दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती है और आपसी विश्वास को मजबूत करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच संबंधों की सबसे बड़ी विशेषता लोगों के बीच आत्मीयता है। दोनों देशों के नागरिक लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में यह जुड़ाव विशेष रूप से दिखाई देता है, जहां दोनों ओर के लोगों के बीच व्यापारिक, धार्मिक और पारिवारिक संबंधों का लंबा इतिहास रहा है।धामी ने गोरखा समुदाय की गौरवशाली परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समुदाय ने अपने साहस, परिश्रम और अनुशासन के बल पर समाज में विशिष्ट स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि गोरखा समाज की पहचान केवल उसकी वीरता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के कारण भी यह समुदाय सम्मान का पात्र है।मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना और देश की सुरक्षा में गोरखा सैनिकों के ऐतिहासिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गोरखा सैनिकों की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल लंबे समय से दी जाती रही है। कठिन परिस्थितियों में देश की रक्षा के लिए उनका समर्पण प्रेरणादायक रहा है। गोरखा समुदाय की यह परंपरा नई पीढ़ी को साहस, अनुशासन और राष्ट्रसेवा का संदेश देती है।
गोरखा महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इनके माध्यम से नई पीढ़ी अपनी भाषा, लोककला, संगीत, नृत्य और पारंपरिक रीति-रिवाजों से परिचित होती है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल किसी एक समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है।उत्तराखंड में गोरखा समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति का उल्लेख करते हुए धामी ने कहा कि राज्य की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को समृद्ध बनाने में इस समुदाय की भूमिका रही है। गोरखा समाज ने उत्तराखंड के विकास और सामाजिक जीवन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि राज्य की विविध सांस्कृतिक परंपराएं ही उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के धार्मिक संबंधों की चर्चा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच आस्था का भी गहरा जुड़ाव है। नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर और भारत के प्रमुख तीर्थस्थल दोनों देशों के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से यह रिश्ता लगातार मजबूत होता रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भाषा, खानपान और सामाजिक परंपराओं में भी समानताएं हैं। ये समानताएं केवल भौगोलिक निकटता का परिणाम नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संपर्क की पहचान हैं।भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा व्यवस्था भी दोनों देशों के विशिष्ट संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे लोगों के बीच आवागमन, व्यापार और सामाजिक संपर्क को बढ़ावा मिलता है। विशेष रूप से उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में नेपाल के साथ संपर्क स्थानीय जीवन और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।मुख्यमंत्री धामी ने सांस्कृतिक विविधता को समाज की शक्ति बताते हुए कहा कि अलग-अलग समुदायों की परंपराओं का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता है। गोरखा महोत्सव जैसे आयोजन इस भावना को मजबूत करने में सहायक होते हैं। ऐसे कार्यक्रम लोगों को एक-दूसरे की संस्कृति समझने और आपसी सद्भाव बढ़ाने का अवसर देते हैं।उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है, लेकिन अपनी भाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी अपने इतिहास और पूर्वजों के योगदान के बारे में जान सकती है।
गोरखा महोत्सव भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। ऐसे आयोजनों में पारंपरिक लोकनृत्य, संगीत, वेशभूषा, खानपान और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से गोरखा समाज की पहचान को प्रदर्शित किया जाता है। इससे न केवल समुदाय की परंपराओं को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि अन्य लोगों को भी उसकी समृद्ध विरासत से परिचित होने का अवसर मिलता है।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संबोधन का मुख्य संदेश भारत और नेपाल के बीच भावनात्मक जुड़ाव तथा साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्व रहा। उन्होंने गोरखा समुदाय की परंपराओं और योगदान को रेखांकित करते हुए दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।गोरखा महोत्सव के माध्यम से एक बार फिर यह संदेश सामने आया कि भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक या भौगोलिक निकटता पर आधारित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, आत्मीयता और साझा सांस्कृतिक पहचान की मजबूत नींव पर टिके हुए हैं।