खतरनाक सड़कें, सुरक्षा का अभाव: पाकिस्तान का पंजाब बुनियादी ढांचे की विफलता से जूझ रहा
Lahore : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सड़क सुरक्षा का संकट गहराता जा रहा है। सड़क हादसों में बढ़ोतरी से शहरी योजना, बुनियादी ढांचे के प्रबंधन और ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, तेज़ी से हो रहे शहरीकरण, गाड़ियों की बढ़ती संख्या और पैदल चलने वालों के लिए अपर्याप्त सुविधाओं के कारण पूरे प्रांत में सड़क हादसों में मरने वालों और घायल होने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने बताया कि सड़क विकास की कई परियोजनाओं और ट्रैफिक प्रबंधन की पहलों के बावजूद, पंजाब में हर महीने हज़ारों की संख्या में हादसे हो रहे हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' द्वारा उद्धृत विशेषज्ञों ने तेज़ रफ़्तार, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन, मोटरसाइकिल के बढ़ते इस्तेमाल, अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचे की कमी को हादसों की बढ़ती संख्या के पीछे मुख्य कारण बताया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की जांच में 'रेस्क्यू 1122' के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि पंजाब में जनवरी 2026 में 36,000 से ज़्यादा सड़क हादसे हुए, जिनमें 463 लोगों की मौत हुई और 17,000 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मई 2026 में प्रांत में 43,000 से ज़्यादा हादसे हुए, जिनमें 434 लोगों की मौत हुई और 23,000 से ज़्यादा लोग घायल हुए।
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि आबादी के दबाव, व्यावसायिक गतिविधियों और ट्रैफिक की बढ़ती मात्रा के कारण लाहौर सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर बना हुआ है। नहर रोड, फ़िरोज़पुर रोड, मुल्तान रोड, जेल रोड, जीटी रोड और मेन बुलेवार्ड जैसी प्रमुख सड़कों पर अक्सर हादसे होते रहते हैं।
'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की जांच में पाया गया कि सही फुटपाथ, पैदल यात्री क्रॉसिंग और पैदल चलने के लिए सुरक्षित जगहों की कमी लाहौर के लिए सड़क सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। कई व्यावसायिक इलाकों में पैदल चलने वालों को तेज़ रफ़्तार गाड़ियों के साथ-साथ चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि सर्विस रोड अक्सर खड़ी गाड़ियों से घिरे रहते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हालांकि लाहौर डेवलपमेंट अथॉरिटी और मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन जैसी एजेंसियों ने फुट-ओवर ब्रिज और अंडरपास बनाए हैं, लेकिन खराब रखरखाव, क्षतिग्रस्त ढांचे, अपर्याप्त रोशनी और अतिक्रमण के कारण कई का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता है। रिपोर्ट के अनुसार, बिना सही लाइसेंस के कम उम्र के लोगों द्वारा इलेक्ट्रिक स्कूटर का बढ़ता इस्तेमाल सुरक्षा के लिए एक और चिंता का विषय बन गया है।