काठमांडू। नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ में कई बस्तियां तबाह हो गईं और लोगों के घर, सामान तथा वर्षों की मेहनत से बनाई गई संपत्ति पानी और मलबे में बह गई। इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों में नांगसी तमांग और उनके पति भी शामिल हैं। बुजुर्ग दंपति ने किसी तरह अपनी जान तो बचा ली, लेकिन उनका घर और घरेलू सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गया। अब दोनों नए सिरे से जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं।रसुवा के खालते इलाके में टीन की छत वाले एक कमरे के अंदर नांगसी तमांग फर्श पर लाल मिट्टी का लेप लगा रही हैं। यह साधारण-सा कमरा उनके लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है। मिट्टी सूखने के बाद यह उनका नया आशियाना बन जाएगा। भले ही इसमें पहले जैसी सुविधाएं नहीं होंगी, लेकिन सिर छिपाने के लिए सुरक्षित जगह मिलने की उम्मीद उनके चेहरे पर दिखाई देती है।
रिश्तेदारों के फोन ने बचाई बुजुर्ग दंपति की जान
26 अगस्त की सुबह खालते और आसपास के इलाकों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। नदी में तेज बहाव के साथ पानी, मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर आने लगे। इस दौरान नांगसी तमांग और उनके पति को रिश्तेदारों ने फोन करके बाढ़ की चेतावनी दी।चेतावनी मिलते ही दोनों ने घर छोड़ने का फैसला किया। उनके पास जरूरी सामान समेटने तक का समय नहीं था। वे केवल पहने हुए कपड़ों में ही घर से निकल गए।नदी किनारे रहने वाले अन्य लोगों ने भी खतरे को भांपते हुए ऊंचे स्थानों की ओर भागना शुरू कर दिया। समय रहते सुरक्षित जगह पहुंचने के कारण बुजुर्ग दंपति और उनके साथ निकले अन्य लोग अपनी जान बचाने में कामयाब रहे।
देखते ही देखते बह गई पूरी बस्ती
बाढ़ का प्रवाह इतना तेज था कि खालते इलाके की बस्ती पानी और मलबे की चपेट में आ गई। देखते ही देखते कई मकान बह गए और आसपास का इलाका मलबे से भर गया।26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में अचानक आए पानी के सैलाब ने रसुवा सहित कई इलाकों में व्यापक नुकसान पहुंचाया था। बाढ़ के साथ बड़ी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और अन्य मलबा बहकर आया, जिससे नदी किनारे बसे गांवों को गंभीर नुकसान हुआ।
बाढ़ पीड़ितों के सामने पुनर्वास की चुनौती
आपदा से बच निकले लोगों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित स्थान पर दोबारा घर बसाने की है। कई परिवारों के पास न रहने की स्थायी जगह बची है और न ही रोजमर्रा की जरूरतों का सामान।नांगसी तमांग और उनके पति भी इसी संघर्ष से गुजर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर फिर से घर बनाना उनके लिए आसान नहीं है। इसके बावजूद दोनों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है।बुजुर्ग महिला अपने नए कमरे को रहने योग्य बनाने में जुटी हैं। मिट्टी से फर्श तैयार करने का उनका प्रयास इस बात का प्रतीक है कि आपदा में सबकुछ खो देने के बाद भी जीवन को दोबारा संवारा जा सकता है।
पहले भूकंप और अब बाढ़ ने बढ़ाई मुश्किलें
रसुवा जिले के कई परिवार वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के कारण पहले ही विस्थापित हो चुके थे। इनमें से कुछ परिवार बाद में नदी किनारे स्थित बस्तियों में रहने लगे थे। अगस्त 2026 की बाढ़ ने इन इलाकों को दोबारा तबाही की चपेट में ले लिया।इस आपदा ने पहाड़ी इलाकों में सुरक्षित पुनर्वास और नदी किनारे बसावट के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नए आशियाने से फिर जिंदगी संवारने की उम्मीद
नांगसी तमांग की कहानी केवल एक परिवार का संघर्ष नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों की स्थिति को दर्शाती है जिन्होंने प्राकृतिक आपदा में अपना सबकुछ गंवा दिया।एक ओर बुजुर्ग दंपति छोटे से कमरे में नई जिंदगी शुरू करने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आपदा प्रभावित परिवारों के सुरक्षित पुनर्वास की चुनौती बनी हुई है।इस त्रासदी ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बाढ़ की पूर्व चेतावनी, समय पर सुरक्षित स्थानों की ओर निकासी और जोखिम वाले इलाकों में सुरक्षित आवास की व्यवस्था कितनी आवश्यक है।