टोक्यो। जापान में शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। देश के कांटो क्षेत्र के पूर्वी तट के पास उत्तरी प्रशांत महासागर में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया। भारतीय राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के मुताबिक, भूकंप शुक्रवार शाम 4 बजकर 9 मिनट पर दर्ज किया गया। इसका केंद्र जापान के चिबा प्रांत के चोशी शहर से करीब 145 किलोमीटर दूर समुद्र में था। भूकंप की गहराई लगभग 40 किलोमीटर दर्ज की गई।भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने समुद्र के जलस्तर में मामूली बदलाव की संभावना को लेकर सुनामी पूर्वानुमान जारी किया। हालांकि, एजेंसी की ओर से विनाशकारी सुनामी की आशंका नहीं जताई गई और सुनामी की बड़ी चेतावनी या एडवाइजरी जारी नहीं की गई। अधिकारियों ने तटीय इलाकों की निगरानी बनाए रखने और आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी है। फिलहाल भूकंप के कारण किसी बड़े नुकसान या जनहानि की तत्काल सूचना सामने नहीं आई है।
शाम 4:09 बजे दर्ज किए गए भूकंप के झटके
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप शुक्रवार को भारतीय समयानुसार शाम 4 बजकर 9 मिनट और 29 सेकंड पर आया। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 मापी गई। भूकंप का केंद्र उत्तरी प्रशांत महासागर में कांटो क्षेत्र के पूर्वी तट के पास दर्ज किया गया।NCS की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 35.087 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 142.254 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। इसकी गहराई 40 किलोमीटर बताई गई है।जापान में स्थानीय समय के अनुसार यह भूकंप शाम 7 बजकर 39 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र टोक्यो के दक्षिण-पूर्व में समुद्री क्षेत्र में था। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, इसका केंद्र चिबा प्रांत के असाही शहर से लगभग 169 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में था।
सुनामी को लेकर जारी हुआ पूर्वानुमान
भूकंप के बाद जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने समुद्र के जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव की संभावना को लेकर सुनामी पूर्वानुमान जारी किया। हालांकि, यह सामान्य सुनामी चेतावनी से अलग था। एजेंसी ने किसी बड़े या विनाशकारी समुद्री तूफान जैसी लहरों की आशंका नहीं जताई।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कांटो क्षेत्र के पूर्वी तटीय इलाकों में समुद्र के जलस्तर में हल्का बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों, मछुआरों और समुद्री गतिविधियों से जुड़े लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र के भीतर आने वाले भूकंप के बाद समुद्र के जलस्तर में बदलाव की संभावना की निगरानी करना जरूरी होता है। हालांकि, हर समुद्री भूकंप के बाद विनाशकारी सुनामी आए, ऐसा जरूरी नहीं है। इस मामले में भी जापानी एजेंसी ने बड़े नुकसान की आशंका वाली सुनामी चेतावनी जारी नहीं की।
जापान में महसूस हुई धरती की हलचल
जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने इस भूकंप की तीव्रता जापानी सात-स्तरीय भूकंप तीव्रता पैमाने पर अधिकतम 3 दर्ज की। इस स्तर पर इमारतों के अंदर मौजूद अधिकांश लोगों को झटके महसूस हो सकते हैं और अलमारियों में रखे बर्तन या दूसरी वस्तुएं हिल सकती हैं।अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी जापान के कई हिस्सों में लोगों ने धरती की हलचल महसूस की। हालांकि, शुरुआती जानकारी में किसी बड़े भवन के ढहने, व्यापक संपत्ति नुकसान या लोगों के घायल होने की सूचना नहीं मिली।स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां भूकंप के संभावित प्रभावों पर नजर बनाए हुए हैं। समुद्र के किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर में होने वाले बदलावों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है जापान
जापान दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां भूकंप आने की घटनाएं काफी सामान्य हैं। इसकी प्रमुख वजह देश की भौगोलिक स्थिति है। जापान प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है, जहां कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में आती हैं।जापान के आसपास प्रशांत, फिलीपीन सागर, यूरेशियन और उत्तर अमेरिकी प्लेटों की भूगर्भीय गतिविधियां सक्रिय रहती हैं। इन प्लेटों के आपसी दबाव और हलचल के कारण धरती के भीतर ऊर्जा जमा होती है। जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, तो भूकंप के झटके महसूस होते हैं।देश में हर साल सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप दर्ज किए जाते हैं। इनमें से अधिकतर हल्के होते हैं और उनसे व्यापक नुकसान नहीं होता। हालांकि, समुद्र के भीतर आने वाले शक्तिशाली भूकंप कभी-कभी सुनामी का कारण बन सकते हैं। इसलिए जापान में भूकंप और सुनामी की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और चेतावनी प्रणालियां विकसित की गई हैं।
प्रशासन की नजर समुद्र के जलस्तर पर
6.1 तीव्रता के इस भूकंप के बाद जापानी एजेंसियों का ध्यान समुद्र के जलस्तर में संभावित बदलाव पर है। तटीय क्षेत्रों में समुद्री गतिविधियों और परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की ओर से लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिना आधिकारिक सूचना के किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप के बाद शुरुआती घंटों में समुद्र के जलस्तर की निगरानी महत्वपूर्ण होती है। समुद्र के भीतर पैदा होने वाली हलचल के प्रभाव को समझने के लिए विभिन्न निगरानी केंद्रों से आंकड़े जुटाए जाते हैं।फिलहाल इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नुकसान की खबर नहीं है। जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी की ओर से जारी पूर्वानुमान में केवल समुद्र के जलस्तर में मामूली बदलाव की संभावना बताई गई है। ऐसे में स्थिति पर नजर रखी जा रही है और तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।