Brussels, ब्रसेल्स: यूरोपियन यूनियन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े पारदर्शिता के नए नियम लागू हो गए हैं। इन नियमों के तहत कंपनियों को AI से बने कंटेंट (जैसे डीपफेक) पर साफ़ तौर पर लेबल लगाना होगा, ताकि यूज़र्स असली और बनावटी कंटेंट के बीच फ़र्क समझ सकें।
नए नियमों के अनुसार, चैटबॉट जैसे AI सिस्टम चलाने वाली कंपनियों को यूज़र्स को यह बताना होगा कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ बातचीत कर रहे हैं। AI से बने टेक्स्ट, इमेज और दूसरे कंटेंट पर भी साफ़ लेबल होने चाहिए; पहचान आसान बनाने के लिए इनमें वॉटरमार्क या दूसरे निशान शामिल हो सकते हैं।
नियमों में यह भी कहा गया है कि जब इमोशन रिकग्निशन (भावना पहचानने वाले) या बायोमेट्रिक कैटेगराइज़ेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए, तो ऑपरेटरों को लोगों को इसकी जानकारी देनी होगी। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
यूरोपियन यूनियन ने डीपफेक पर खास ज़ोर दिया है। इसमें ऐसे टेक्स्ट, इमेज, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं जो असली लगते हैं, लेकिन उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया या उनमें बदलाव किया गया होता है।
ये नियम जनहित से जुड़े उन AI-जनरेटेड कंटेंट पर भी लागू होते हैं जिन्हें बिना किसी इंसानी एडिटोरियल देखरेख या समीक्षा के तैयार किया गया है।मौजूदा AI सिस्टम को नए नियमों के हिसाब से ढलने के लिए 2 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है, और "कलात्मक, रचनात्मक, व्यंग्यात्मक या काल्पनिक" कामों के लिए इसमें छूट दी गई है।