सिलीगुड़ी। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पश्चिम बंगाल के पानीटंकी इलाके में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 350 जिंदा कारतूसों के साथ नेपाल के एक नागरिक को पकड़ा है। आरोपी की पहचान 34 वर्षीय गम बहादुर पुन के रूप में हुई है, जो 13 बंगाल बटालियन एनसीसी में हवलदार के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, आरोपी भारत से नेपाल जा रही एक टैक्सी में सवार था। सीमा पर नियमित सुरक्षा जांच के दौरान उसके सामान से .22 कैलिबर के 350 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए खोरीबाड़ी थाना पुलिस के हवाले किया गया। पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए रविवार को उसे सिलीगुड़ी महकमा अदालत में पेश किया और पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की।
भारत से नेपाल जा रही थी टैक्सी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पानीटंकी स्थित भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी के जवान वाहनों और यात्रियों की नियमित जांच कर रहे थे।
इसी दौरान भारत से नेपाल की ओर जा रही एक टैक्सी को जांच के लिए रोका गया। वाहन में सवार यात्रियों के सामान की तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान गम बहादुर पुन के सामान में बड़ी संख्या में कारतूस मिले। एसएसबी के जवानों ने कारतूसों को जब्त करते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया।
बरामद कारतूसों की गिनती करने पर उनकी संख्या 350 पाई गई। सभी कारतूस .22 कैलिबर के बताए गए हैं।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने आरोपी से कारतूसों को लेकर प्रारंभिक पूछताछ की।
एनसीसी में हवलदार होने की जानकारी
पकड़े गए व्यक्ति की पहचान नेपाल के नागरिक गम बहादुर पुन के रूप में हुई है।
उसकी उम्र 34 वर्ष बताई गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वह 13 बंगाल बटालियन एनसीसी में हवलदार के पद पर कार्यरत है।
इस जानकारी के सामने आने के बाद उसके सेवा संबंधी दस्तावेज और कारतूसों की बरामदगी के बीच संबंध की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी के पास इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस कैसे पहुंचे।
इसके अलावा यह भी पता लगाना आवश्यक है कि कारतूसों को भारत से नेपाल ले जाने का उद्देश्य क्या था।
आरोपी की वास्तविक भूमिका और कारतूसों के स्रोत के संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
350 कारतूस मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
भारत-नेपाल सीमा पर 350 जिंदा कारतूसों की बरामदगी को सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है।
आम तौर पर सीमावर्ती इलाकों में यात्रियों और वाहनों की जांच का उद्देश्य अवैध सामान, हथियार और प्रतिबंधित वस्तुओं की आवाजाही रोकना होता है।
ऐसे में किसी यात्री के सामान से इतनी बड़ी संख्या में कारतूस मिलना जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कारतूस व्यक्तिगत उपयोग के लिए ले जाए जा रहे थे या किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचाने की योजना थी।
हालांकि, किसी संगठित तस्करी नेटवर्क से आरोपी का संबंध होने की पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
दुर्गा पूजा के दौरान बढ़ी सतर्कता
दुर्गा पूजा के दौरान सीमा क्षेत्र में यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसी बीच कारतूसों की बरामदगी ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पानीटंकी भारत और नेपाल के बीच महत्वपूर्ण सीमावर्ती आवागमन केंद्रों में शामिल है। यहां से दोनों देशों के नागरिक व्यापार, रोजगार, पर्यटन और पारिवारिक कारणों से यात्रा करते हैं।
भारत-नेपाल की खुली सीमा व्यवस्था के बावजूद निर्धारित जांच चौकियों पर सुरक्षा बल संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करते हैं।
इस कार्रवाई ने एक बार फिर सीमा पर सामान की जांच और अवैध हथियारों की आवाजाही रोकने की आवश्यकता को सामने रखा है।
खोरीबाड़ी पुलिस को सौंपा गया आरोपी
कारतूसों की बरामदगी के बाद एसएसबी ने आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए खोरीबाड़ी थाना पुलिस के सुपुर्द किया।
पुलिस ने मामले में आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की है।
जांच के दौरान आरोपी से कारतूसों की खरीद, उन्हें अपने पास रखने के उद्देश्य और नेपाल ले जाने की वजह के बारे में पूछताछ की जा सकती है।
पुलिस के लिए यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि उसके पास कारतूस रखने या परिवहन करने से संबंधित कोई वैध अनुमति थी या नहीं।
यदि आरोपी कोई दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो उसकी वैधता और सीमा पार परिवहन से जुड़े नियमों के आधार पर जांच की जाएगी।
सिलीगुड़ी महकमा अदालत में पेशी
जानकारी के अनुसार, खोरीबाड़ी थाना पुलिस ने रविवार को आरोपी गम बहादुर पुन को सिलीगुड़ी महकमा अदालत में पेश किया।
पुलिस ने उससे विस्तृत पूछताछ करने के लिए अदालत से रिमांड की मांग की।
रिमांड के दौरान जांच अधिकारी कारतूसों के स्रोत और संभावित संपर्कों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर सकते हैं।
हालांकि, अदालत ने कितने दिनों की रिमांड मंजूर की या आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
इसलिए फिलहाल पुलिस की ओर से रिमांड मांगे जाने की जानकारी ही सामने आई है।
कारतूसों के स्रोत का पता लगाना बड़ी चुनौती
पुलिस जांच में कारतूसों के स्रोत का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा।
जांच अधिकारी यह जानने का प्रयास कर सकते हैं कि आरोपी को इतनी बड़ी संख्या में कारतूस किसने उपलब्ध कराए और वह उन्हें कहां ले जा रहा था।
कारतूसों की खरीद-बिक्री और परिवहन से संबंधित दस्तावेज भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
इसके अलावा आरोपी की यात्रा और उसके संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाने से घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कारतूस किसी आपराधिक गतिविधि या संगठित तस्करी के लिए ले जाए जा रहे थे।
पानीटंकी सीमा पर पहले भी हुई हैं बरामदगी
पानीटंकी स्थित भारत-नेपाल सीमा पर इससे पहले भी हथियार और कारतूस बरामद किए जा चुके हैं।
अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह में एसएसबी ने नेपाल जा रहे एक व्यक्ति के सामान से पिस्तौल, दो मैगजीन और 49 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। उस मामले में व्यक्ति के पास हथियार का लाइसेंस था, लेकिन सीमा पार हथियार ले जाने की अनुमति को लेकर सवाल उठे थे।
इसी प्रकार 14 अक्टूबर की रात सीमा जांच के दौरान एक एंबुलेंस में सवार मणिपुर के युवक के सामान से 9 एमएम का एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया था।
ये अलग-अलग घटनाएं हैं और वर्तमान मामले से इनके किसी सीधे संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
पानीटंकी में 350 जिंदा कारतूसों के साथ नेपाल के नागरिक की गिरफ्तारी ने सीमा सुरक्षा से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं।
जांच का मुख्य विषय अब कारतूसों का स्रोत, उनके परिवहन की वैधता और आरोपी की वास्तविक मंशा है।
एसएसबी की कार्रवाई के बाद खोरीबाड़ी पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपी को अदालत में पेश करके पूछताछ के लिए रिमांड मांगा गया है।
अब जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस भारत से नेपाल क्यों ले जाए जा रहे थे।