हूती विद्रोहियों ने किया धुआं-धुआं, मिडिल ईस्ट में गहराया तनाव

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Update: 2026-08-09 11:55 GMT

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के देशों में एक बार फिर से तनाव काफी बढ़ गया है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अरामको ऑयल फैसिलिटी पर ड्रोन से हमला करने का दावा किया है. इस हमले के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर हलचल तेज हो गई है.

हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने बयान जारी कर बताया कि उन्होंने जिजान शहर में मौजूद अरामको की एक रिफाइनरी को ड्रोन हमले का निशाना बनाया. हूती विद्रोहियों का कहना है कि यह हमला यमन के प्रांतों में सऊदी ड्रोन्स के एयरस्पेस के उल्लंघन के जवाब में किया गया है.
दूसरी ओर, सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की कि रविवार तड़के अरामको रिफाइनरी से जुड़े एक प्लांट में आग लग गई थी. गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं है.
मंत्रालय के मुताबिक, आग पर समय रहते काबू पा लिया गया और उसे पूरी तरह बुझा दिया गया. हालांकि आग लगने के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इसके अलावा, यमन सरकार के अधिकारियों ने बताया कि हूतियों ने रेड सी के अहम मोखा बंदरगाह पर भी मिसाइल और ड्रोन दागे हैं.
एक तरफ जहां यमन में संघर्ष बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया हैय तेहरान में पत्रकारों से बात करते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने साफ कहा कि अमेरिका के साथ मध्यस्थों के जरिए बातचीत हो तो रही है, लेकिन इसे सीधी बातचीत नहीं कहा जा सकता.
ईरान की शक्तिशाली सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने एक बयान जारी कर कहा है कि जब तक अमेरिका अपना व्यवहार नहीं सुधारता और ईरान पर लगाई गई पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा नहीं खोला जाएगा.
ईरान ने मांग की है कि अमेरिका उन्हें दोबारा कभी धमकी न दे, युद्ध के हर्जाने की पूरी भरपाई करे और उसके फ्रीज किए गए फंड को बिना किसी शर्त के रिहा करें. उधर, ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौते पर बातचीत आखिरी दौर में है, जिसके तहत बिना किसी टोल या फीस के जहाजों को निकलने के लिए एक नया समुद्री रास्ता मिल सकता है.
इस बीच, अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने भी अपनी सैन्य तैयारियों को लेकर बड़ा कदम उठाया है. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने शनिवार को एक बयान में कहा कि विभाग हथियारों के उत्पादन और खरीद को तेजी से बढ़ाने पर पूरा जोर दे रहा है. इससे युद्ध के मैदान में सैनिकों की जरूरत को समय पर पूरा किया जा सकेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ चल रहे पांच महीने के संघर्ष के कारण अमेरिकी सेना के पास एडवांस मिसाइल इंटरसेप्टर और हथियारों के स्टॉक में भारी कमी आई है, जिससे निपटने के लिए अब हथियारों का उत्पादन तेजी से करने की तैयारी चल रही है. मध्य पूर्व के इन ताजा घटनाक्रमों ने क्षेत्र में एक बार फिर युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
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