ईरान में सत्ता परिवर्तन का इजरायली प्लान कैसे हुआ फेल?

Update: 2026-07-14 16:20 GMT

वॉशिंगटन। इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर एक गुप्त योजना तैयार की थी, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद को अहम भूमिका में रखा गया था। हालांकि, यह कथित योजना सफल नहीं हो सकी।

दावे के मुताबिक, इजरायल की रणनीति ईरान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाने की थी। इस योजना के केंद्र में जिस व्यक्ति का नाम सामने आया, वह महमूद अहमदीनेजाद हैं, जो 2005 से 2013 तक ईरान के राष्ट्रपति रह चुके हैं। अहमदीनेजाद को ईरान के कट्टरपंथी नेताओं में गिना जाता है और उनके कार्यकाल के दौरान अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के संबंध बेहद तनावपूर्ण रहे थे।

अहमदीनेजाद अपने कड़े बयानों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय विवादों के कारण अक्सर चर्चा में रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना की थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इजरायल जैसी विरोधी शक्ति उन्हें किसी संभावित राजनीतिक बदलाव के केंद्र में क्यों रखती।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने ईरान में आंतरिक असंतोष और राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं को देखते हुए यह रणनीति बनाई थी। हालांकि, यह योजना कथित तौर पर आगे नहीं बढ़ सकी और इसके सफल होने से पहले ही इसके संकेत सामने आ गए।

बताया जा रहा है कि अहमदीनेजाद अब ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की हिरासत में हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी स्थिति और हिरासत को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

ईरान की राजनीति में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती है। यह संगठन देश की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक मामलों में भी महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। ईरान की मौजूदा व्यवस्था में किसी भी बड़े राजनीतिक बदलाव के लिए इस संस्था की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।

इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी कई दशकों पुरानी है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर लगातार तनाव बना हुआ है। इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है, जबकि ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश में सत्ता परिवर्तन की कोशिश बेहद जटिल प्रक्रिया होती है, खासकर ऐसे देश में जहां मजबूत सुरक्षा संस्थाएं और राजनीतिक ढांचा मौजूद हो। ईरान में सरकार और सुरक्षा तंत्र की मजबूत पकड़ के कारण बाहरी हस्तक्षेप के प्रयासों को सफल बनाना आसान नहीं है।

महमूद अहमदीनेजाद का नाम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आने से ईरान की राजनीति पर नजरें बढ़ गई हैं। हालांकि, इजरायल की कथित योजना और उसकी वास्तविकता को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ईरान और इजरायल के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच किसी भी राजनीतिक हलचल का असर पूरे पश्चिम एशिया पर पड़ सकता है।

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