यरुशलम। इजरायल में आम चुनाव के बाद नई सरकार के गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यिस्राएल बेतेनु पार्टी के प्रमुख एविगडोर लिबरमैन ने अपने लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक रुख में महत्वपूर्ण बदलाव करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि वह अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने की संभावना पर विचार करने और सैन्य भर्ती से संबंधित प्रस्तावित कानून पर समझौता करने के लिए तैयार हैं। लिबरमैन का यह फैसला इजरायल में नई सरकार के गठन की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में लिबरमैन ने स्पष्ट किया कि मौजूदा चुनावी परिणामों और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए सभी दलों को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। उन्होंने माना कि देश के सामने मौजूद चुनौतियों के कारण राजनीतिक नेताओं को कठिन फैसले लेने होंगे और कुछ मुद्दों पर समझौता भी करना पड़ेगा।लिबरमैन लंबे समय से अति-रूढ़िवादी यहूदी समुदाय, जिसे इजरायल में हरेदी कहा जाता है, के पुरुषों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा के पक्षधर रहे हैं। वह धार्मिक आधार पर सैन्य सेवा से मिलने वाली व्यापक छूट का विरोध करते रहे हैं। इसी मुद्दे पर उनके और धार्मिक राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं।
हालांकि, अब उन्होंने संकेत दिया है कि यदि नई सरकार बनाने और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के शासन को समाप्त करने के लिए जरूरी हुआ, तो वह सैन्य भर्ती कानून पर अपने पुराने रुख में लचीलापन दिखा सकते हैं।इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए आम चुनाव के बाद किसी एक राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। देश की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है।चुनाव परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले राजनीतिक खेमे को 53 सीटें मिली हैं। वहीं, नेतन्याहू विरोधी यहूदी नेतृत्व वाले दलों के पास 48 सीटें हैं। अरब नेतृत्व वाले दो दलों के पास कुल 19 सीटें हैं। ऐसे में सरकार गठन के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बातचीत और समर्थन जुटाने की प्रक्रिया जारी है।लिबरमैन ने अपने बयान में तीन प्रमुख राजनीतिक शर्तें भी स्पष्ट की हैं। पहली शर्त यह है कि नेतन्याहू के शासन का अंत होना चाहिए। दूसरी, देश को दोबारा चुनाव की स्थिति में नहीं जाना चाहिए। तीसरी, ऐसी सरकार नहीं बननी चाहिए जो अरब राजनीतिक दलों जॉइंट लिस्ट और राअम के समर्थन या मतदान से अनुपस्थित रहने पर निर्भर हो।उन्होंने कहा कि इन तीन मुद्दों पर उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है और इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, अन्य राजनीतिक विषयों पर बातचीत तथा समझौते की गुंजाइश बनी रह सकती है।
लिबरमैन का मानना है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में किसी एक मुद्दे पर अड़े रहने से नई सरकार के गठन की संभावना कमजोर हो सकती है। उन्होंने राष्ट्रीय हित को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ संभावित सहयोग है। इनमें यूनाइटेड तोराह जूडाइज़्म (UTJ) और शास जैसे दल शामिल हैं। ये दल लंबे समय से धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वाले हरेदी पुरुषों के लिए सैन्य भर्ती संबंधी विशेष व्यवस्था की मांग करते रहे हैं।दूसरी ओर, लिबरमैन का कहना रहा है कि देश की सुरक्षा में सभी नागरिकों की भागीदारी होनी चाहिए। अनिवार्य सैन्य सेवा से संबंधित कानून इजरायल की राजनीति में लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।इजरायल में अधिकांश यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, हरेदी समुदाय के धार्मिक अध्ययन में लगे पुरुषों की भर्ती को लेकर विशेष व्यवस्था और छूट का प्रश्न दशकों से राजनीतिक तथा कानूनी विवादों का केंद्र रहा है।इस मुद्दे पर धार्मिक दलों और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक संगठनों के बीच गंभीर मतभेद हैं। धार्मिक दल अपनी परंपराओं और धार्मिक शिक्षा की सुरक्षा पर जोर देते हैं, जबकि अनिवार्य भर्ती के समर्थक सभी नागरिकों के बीच सैन्य जिम्मेदारियों के समान बंटवारे की मांग करते हैं।
लिबरमैन के नए रुख के बाद यूनाइटेड तोराह जूडाइज़्म के अध्यक्ष याकोव आशेर ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सैन्य भर्ती कानून पर लचीलापन दिखाने की इच्छा का स्वागत किया। हालांकि, आशेर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल होने का कोई औपचारिक प्रस्ताव अभी प्राप्त नहीं हुआ है।उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव सामने आता है, तो पार्टी के धार्मिक नेतृत्व की सलाह और निर्णय के अनुसार उस पर विचार किया जाएगा।इस बीच याशार पार्टी के नेता गादी आइजनकोट नई सरकार के संभावित नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे हैं। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ राजनीतिक दलों की बातचीत के दौरान आइजनकोट को 67 सांसदों का समर्थन प्राप्त हुआ, जबकि नेतन्याहू को 46 सांसदों की सिफारिश मिली। हालांकि, किसी नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का अंतिम फैसला राष्ट्रपति को करना है।रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति हर्जोग रविवार को यह घोषणा कर सकते हैं कि किस नेता को नई सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।लिबरमैन ने प्रधानमंत्री पद को लेकर किसी रोटेशन समझौते की खबरों को भी खारिज किया है। ऐसी अटकलें थीं कि वह और गादी आइजनकोट बारी-बारी से प्रधानमंत्री बनने की व्यवस्था पर विचार कर सकते हैं।
लेकिन लिबरमैन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस विषय पर किसी के साथ बातचीत नहीं की है। उन्होंने प्रधानमंत्री पद को साझा करने वाली व्यवस्था को देश के प्रशासनिक संचालन के लिए नुकसानदायक बताया।लिबरमैन ने यह भी चेतावनी दी कि यदि विपक्षी दल कमजोर अल्पमत सरकार बनाते हैं, तो उसके जल्द गिरने का खतरा रहेगा। उन्होंने 2021 में बनी बेनेट-लापिड सरकार का उदाहरण दिया, जो लगभग एक वर्ष बाद गिर गई थी और उसके बाद नेतन्याहू सत्ता में लौट आए थे।उनका मानना है कि नई सरकार के लिए कम से कम 61 सांसदों का स्थिर समर्थन सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने संभावना जताई कि सरकार गठन के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के कुछ सांसद भी नए गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, यह उनका राजनीतिक अनुमान है और इसकी पुष्टि नहीं हुई है।लिबरमैन के बदले रुख की आलोचना भी शुरू हो गई है। रिजर्विस्ट्स पार्टी के नेता योआज़ हेंडेल ने सैन्य भर्ती के मुद्दे पर समझौते की संभावना का विरोध किया। उनका आरोप है कि राजनीतिक सत्ता हासिल करने के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर समझौता करना उचित नहीं होगा।फिलहाल लिबरमैन के बयान से इजरायल में नई सरकार बनाने की बातचीत को नई दिशा मिली है। हालांकि, अति-रूढ़िवादी दलों के साथ गठबंधन या सैन्य भर्ती कानून पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। अब सभी की नजर राष्ट्रपति के फैसले और संभावित गठबंधन सहयोगियों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी है।
Tags: