विपक्ष के विरोध के बीच प्रस्ताव पारित, खैबर पख्तूनख्वा पर केंद्र का सीधा नियंत्रण
संसद ने लगाई फैसले पर मुहर
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। गुरुवार, 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति की दोनों घोषणाओं के समर्थन में प्रस्ताव पारित किए गए। इसके साथ इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित करने के कदम को संसदीय समर्थन मिल गया।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर 11 अक्टूबर को यह फैसला लिया था। संघीय सरकार ने प्रांत की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद से निपटने में प्रांतीय प्रशासन के सहयोग को लेकर चिंताओं का हवाला दिया। इस कदम से खैबर पख्तूनख्वा का प्रशासन केंद्र के सीधे नियंत्रण में आ गया। संयुक्त सत्र में संसदीय मामलों के मंत्री तारिक फजल चौधरी ने प्रस्ताव पेश किए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद इन्हें स्वीकृति मिली। एक प्रस्ताव आपातकाल की घोषणा से संबंधित था, जबकि दूसरा गवर्नर शासन को मंजूरी देने के लिए लाया गया था। दोनों घोषणाएं अलग-अलग संवैधानिक प्रावधानों के तहत जारी हुई थीं।
सरकार का कहना है कि सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह कदम आवश्यक था। कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने फैसले का बचाव करते हुए प्रांत में बढ़ती आतंकवादी घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित रिपोर्टों पर विचार करने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी कहा कि फैसला लेने से पहले प्रांतीय सरकार के साथ सहमति बनाने के प्रयास हुए थे। पीटीआई ने संघीय सरकार के तर्कों को खारिज किया है। पार्टी का आरोप है कि सुरक्षा स्थिति को राजनीतिक नियंत्रण हासिल करने के बहाने के रूप में इस्तेमाल किया गया। खैबर पख्तूनख्वा इमरान खान की पार्टी के शासन वाला अंतिम प्रांत था, इसलिए वहां सरकार का निलंबन केंद्र और पीटीआई के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ाने वाला कदम बना है।
पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान ने आपातकाल और गवर्नर शासन का विरोध करते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। उन्होंने अपनी पार्टी पर आतंकवाद के समर्थन से जुड़े आरोपों को भी अस्वीकार किया। विपक्ष इसे जनादेश के खिलाफ कदम बता रहा है, जबकि सरकार सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की जरूरत पर कायम है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पीटीआई और संघीय सरकार के बीच तनाव बना हुआ है। आपातकाल लगाए जाने से पहले पार्टी समर्थक इस्लामाबाद की ओर मार्च की तैयारी के लिए प्रांत में जुटे थे। अब संसदीय मंजूरी के बाद प्रशासनिक बदलाव के साथ राजनीतिक विवाद भी जारी है।