पाकिस्तान: आर्थिक संकट का असर आम लोगों की जिंदगी पर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले छह वर्षों में देश में गरीबी दर तेजी से बढ़ी है और अब करीब 29 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में गरीबी दर 2018-19 में 21.8 प्रतिशत थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई है। यानी छह साल के भीतर गरीबी में करीब सात प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में बढ़ती गरीबी के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक अस्थिरता, विदेशी भुगतान संकट और कोविड-19 महामारी के बाद पैदा हुई चुनौतियां प्रमुख हैं। इन सभी कारणों ने आम लोगों की आय और खर्च करने की क्षमता को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिला है। शहरों की तुलना में गांवों में रहने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति अधिक खराब हुई है। शहरी क्षेत्रों में गरीबी दर में लगभग छह प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हुई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी करीब आठ प्रतिशत अंकों तक पहुंच गई है।
ग्रामीण पाकिस्तान की बड़ी आबादी खेती और दैनिक मजदूरी पर निर्भर रहती है। ऐसे परिवारों के पास आमतौर पर बचत या अन्य आर्थिक संसाधन कम होते हैं। ऐसे में जब महंगाई बढ़ती है और रोजगार के अवसर सीमित होते हैं तो सबसे ज्यादा असर इन्हीं परिवारों पर पड़ता है।
पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान को कई आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। देश को बार-बार विदेशी मुद्रा संकट और भुगतान संतुलन की समस्या से गुजरना पड़ा है। इसके कारण सरकार को कई बार आर्थिक सुधारों और कड़े फैसलों का सहारा लेना पड़ा, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ा।
महंगाई बढ़ने से खाने-पीने की चीजों, ईंधन, बिजली और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है। कम आय वाले परिवारों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि लगातार दो सर्वेक्षणों के दौरान महंगाई को ध्यान में रखते हुए परिवारों की औसत आय और खर्च करने की क्षमता में गिरावट दर्ज की गई है।
गरीबी बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी बताया जा रहा है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया है। अधिक आय वाले वर्गों को विकास का ज्यादा फायदा मिला, जबकि गरीब और निम्न आय वाले परिवार आर्थिक दबाव में आते गए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गरीब परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा मजदूरी पर निर्भर होता है। उनके पास संपत्ति, निवेश या अन्य आय के साधन सीमित होते हैं। ऐसे में महंगाई और आर्थिक संकट का असर उन पर ज्यादा तेजी से पड़ता है।
पाकिस्तान में रोजगार के अवसरों की कमी भी गरीबी बढ़ने का एक प्रमुख कारण है। युवा आबादी के लिए पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध नहीं होने के कारण बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है। इससे परिवारों की आय प्रभावित हो रही है और जीवन स्तर नीचे जा रहा है।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ गरीब वर्गों को राहत पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने तथा महंगाई को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीतियों की जरूरत है।
पाकिस्तान की बढ़ती गरीबी केवल आर्थिक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती भी बनती जा रही है। यदि आम लोगों की आय बढ़ाने और जीवन स्तर सुधारने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में आर्थिक असमानता और बढ़ सकती है। मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के साथ-साथ गरीब तबके के लिए मजबूत योजनाएं लागू करने की जरूरत है।