PM Modi ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति को भेंट की असम की दुर्लभ मनोहारी गोल्ड टी

Update: 2026-07-13 07:48 GMT

Indonesia इंडोनेशिया : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो के भारत दौरे के दौरान उन्हें असम की प्रसिद्ध और दुर्लभ मनोहारी गोल्ड टी उपहार के रूप में भेंट की। यह खास चाय भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और कृषि विरासत का प्रतिनिधित्व करती है। अपनी अनोखी गुणवत्ता, दुर्लभ उत्पादन प्रक्रिया और प्रीमियम कीमत के कारण मनोहारी गोल्ड टी को दुनिया की सबसे खास चायों में शामिल किया जाता है।

प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए उपहारों में भारत की विविध परंपराओं और स्थानीय उत्पादों की झलक दिखाई दी। मनोहारी गोल्ड टी असम की चाय उद्योग की उत्कृष्टता और वहां के चाय उत्पादकों की मेहनत को दर्शाती है।

क्या है मनोहारी गोल्ड टी की खासियत?

मनोहारी गोल्ड टी असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित मनोहारी टी एस्टेट में तैयार की जाती है। यह चाय अपने सुनहरे रंग, विशेष स्वाद और सीमित उत्पादन के कारण बेहद खास मानी जाती है। इसे बनाने के लिए चाय की बेहद कोमल और चुनिंदा पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है।



इस चाय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुनहरी कलियां होती हैं, जिन्हें चाय की भाषा में गोल्डन टिप्स कहा जाता है। ये कलियां सामान्य चाय की पत्तियों से अलग होती हैं और इनमें स्वाद व सुगंध की विशेष गुणवत्ता पाई जाती है।

कैसे तैयार होती है गोल्ड टी?

मनोहारी गोल्ड टी को तैयार करने की प्रक्रिया काफी मेहनत और सावधानी से पूरी की जाती है। इसके लिए चाय की सबसे अच्छी और कोमल कलियों को हाथ से चुना जाता है। हर पत्ती को विशेषज्ञों की निगरानी में तोड़ा जाता है ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे।

चाय बनाने की प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं:

1. पत्तियों का चयन:

सबसे पहले चाय बागान से केवल चुनिंदा और उच्च गुणवत्ता वाली कलियों को चुना जाता है। इसमें छोटे आकार की सुनहरी कलियों को प्राथमिकता दी जाती है।

2. सुखाने की प्रक्रिया:

चुनी गई कलियों को नियंत्रित तापमान में सुखाया जाता है, ताकि उनमें मौजूद प्राकृतिक सुगंध और स्वाद बरकरार रहे।

3. ऑक्सीकरण और प्रोसेसिंग:

इसके बाद पत्तियों को विशेष प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे उनका रंग, स्वाद और खुशबू विकसित होती है।

4. अंतिम छंटाई:

तैयार चाय को गुणवत्ता के आधार पर जांचा जाता है और फिर पैक किया जाता है।

सीमित उत्पादन बनाता है इसे दुर्लभ

मनोहारी गोल्ड टी का उत्पादन बहुत सीमित मात्रा में होता है। यही वजह है कि इसकी मांग दुनिया भर में बनी रहती है। सामान्य चाय की तुलना में इसे तैयार करने में अधिक समय, मेहनत और विशेषज्ञता की जरूरत होती है।

इस चाय की कीमत भी इसकी दुर्लभता को दर्शाती है। कई बार इसकी नीलामी में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। इसे खरीदने वाले ग्राहक आमतौर पर प्रीमियम चाय के शौकीन और विशेष संग्रह करने वाले लोग होते हैं।

असम की चाय विरासत का प्रतीक

असम भारत के सबसे बड़े चाय उत्पादक राज्यों में से एक है। यहां की चाय दुनियाभर में अपनी मजबूत खुशबू और अलग स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। मनोहारी गोल्ड टी इसी विरासत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

असम की चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, श्रमिकों की मेहनत और कृषि परंपरा से जुड़ी हुई है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसे विदेशी नेता को उपहार के रूप में देना भारत की स्थानीय पहचान और उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों में सांस्कृतिक संदेश

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो को दिया गया यह उपहार केवल एक चाय का पैकेट नहीं, बल्कि भारत की विविधता और परंपराओं का प्रतीक है। भारत अपने विदेशी मेहमानों को अक्सर ऐसे विशेष उत्पाद भेंट करता है, जो देश की संस्कृति, कला और स्थानीय विरासत को दर्शाते हैं।

मनोहारी गोल्ड टी के माध्यम से असम की पहचान को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यह उपहार भारत की कृषि क्षमता, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कौशल को दुनिया के सामने पेश करने का एक माध्यम बना है।

मनोहारी गोल्ड टी की लोकप्रियता यह साबित करती है कि भारत के स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने की क्षमता है। अपनी दुर्लभता और अनोखी गुणवत्ता के कारण यह चाय आज असम ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की प्रतिष्ठित पहचान बन चुकी है।

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