इजरायल-सऊदी पर हमले की तैयारी? हूतियों को चीनी मदद मिलने का दावा
इजरायल-सऊदी को निशाना बनाने का दावा
नई दिल्ली: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही चीन से भेजे गए पुर्जों के जरिए उन्नत बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हथियारों और उनकी आपूर्ति की निगरानी करने वाले संगठन कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की जांच में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बरामद सामग्री से संकेत मिलता है कि समूह ईरान की खेबर शेकन मिसाइल के एक संस्करण का कम से कम कुछ हिस्सा स्थानीय स्तर पर तैयार करना चाहता है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब हूतियों और सऊदी अरब के बीच सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है।
रिपोर्ट में उल्लिखित मिसाइल कार्यक्रम को सऊदी अरब और इजरायल की सुरक्षा के लिए संभावित चुनौती माना गया है। संबंधित ईरानी डिजाइन पर आधारित मिसाइल की पहुंच लगभग 1,200 मील, यानी करीब 1,900 किलोमीटर तक बताई गई है। हालांकि, यह हूतियों के नए संस्करण की किसी सफल परीक्षण उड़ान की पुष्टि नहीं है। उपलब्ध विवरण विकास की कोशिशों और संभावित क्षमता से संबंधित हैं। इसलिए इजरायल और सऊदी अरब पर इन नई मिसाइलों से हमला तय होने के बजाय, उनके संभावित दायरे में आने की बात सामने आई है।
जांच का महत्वपूर्ण आधार यमन में रोकी गई सामान की खेपें हैं। संगठन के अनुसार, जुलाई 2026 में यमनी अधिकारियों ने चार शिपिंग कंटेनरों की सामग्री का दस्तावेजीकरण किया था। ये कंटेनर हूती नियंत्रण वाले होदैदा बंदरगाह की ओर भेजे जा रहे थे। शिपिंग रिकॉर्ड के मुताबिक, वे जून और अक्टूबर 2025 में दो अलग-अलग जहाजों से अदन फ्री जोन पहुंचे थे। दोनों जहाज चीन से आई खेपें लेकर पहुंचे थे और उनका निर्धारित गंतव्य होदैदा था। इन्हीं दस्तावेजों तथा बरामद सामग्री की जांच से आपूर्ति संबंधी कड़ियां सामने आईं।
बरामद सामान में मिसाइल से संबंधित विशेष धातु के हिस्से, उपकरण और अन्य सामग्री शामिल होने की जानकारी दी गई है। जांचकर्ताओं ने कुछ पुर्जों को सामान्य व्यावसायिक उपयोग की वस्तुओं से अलग माना है। उनका आकलन है कि सामग्री का एक हिस्सा विशेष रूप से मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ा दिखाई देता है। यह बात इसलिए अहम है क्योंकि किसी देश में निर्मित सामान की बरामदगी और हथियार बनाने के उद्देश्य से तैयार सामग्री की आपूर्ति, दोनों अलग स्थितियां हैं। रिपोर्ट में पुर्जों की प्रकृति और उनके साथ मिले दस्तावेजों को साथ रखकर निष्कर्ष निकाले गए हैं।
शिपिंग दस्तावेजों में एक चीनी प्रिसिजन मेटल निर्माता का उल्लेख मिलने की बात भी कही गई है। संबंधित कंपनी खुद को एयरोस्पेस के लिए विशेष पुर्जे बनाने वाली निर्माता बताती है। उपलब्ध रिपोर्ट में कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। कुछ सामग्री का नागरिक उपयोग संभव बताया गया, जबकि अन्य हिस्सों को हथियारों के लिए विशेष रूप से तैयार माना गया है। इससे सामान की खरीद, निर्यात और अंतिम प्राप्तकर्ता की निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं। केवल चीनी आपूर्तिकर्ता का नाम सामने आने से चीनी सरकार की प्रत्यक्ष सहायता स्वतः स्थापित नहीं होती।
चीन ने अपनी ओर से अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करने की बात कही है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि बीजिंग सैन्य उत्पादों के निर्यात में जिम्मेदार रुख अपनाता है और नागरिक तथा सैन्य, दोनों उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात पर नियंत्रण रखता है। हालांकि, प्रवक्ता ने जांच के विशिष्ट निष्कर्षों का सीधे जवाब नहीं दिया। चीन पहले हूतियों के सऊदी हवाई अड्डों पर हमलों की निंदा करते हुए तनाव घटाने की अपील भी कर चुका है।
हूतियों के हथियार कार्यक्रम में विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, समूह ने हाल के वर्षों में अपने खरीद नेटवर्क का विस्तार किया है। अब तैयार हथियारों के साथ पुर्जों की आपूर्ति और स्थानीय स्तर पर निर्माण की कोशिशों पर भी ध्यान है। नई रिपोर्ट इसी बदलाव की ओर संकेत करती है। इससे समूह की वास्तविक उत्पादन क्षमता, बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता और प्रतिबंधों के बावजूद सामग्री पहुंचने के रास्तों की निगरानी का महत्व बढ़ा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हूतियों का नया मिसाइल कार्यक्रम किस चरण तक पहुंचा है। विदेशी पुर्जों की खरीद और सफल हथियार निर्माण के बीच अंतर बना हुआ है। रिपोर्ट से आपूर्ति तथा निर्माण की मंशा के संकेत मिलते हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन या नई मिसाइल के पूरी तरह तैयार होने की पुष्टि नहीं होती।