इस्लामाबाद : 27 अक्टूबर 2026। पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई, सेंसरशिप, ऑनलाइन धमकियों और आर्थिक दबाव के बढ़ते मामलों के बीच देश के वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया संगठनों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। लाहौर में आयोजित एक महत्वपूर्ण गोलमेज बैठक में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संयुक्त समिति बनाने पर सहमति बनी। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर बढ़ते प्रतिबंध लोकतांत्रिक व्यवस्था और नागरिकों के सूचना के अधिकार के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं।
लाहौर में पत्रकारों और नागरिक संगठनों की बड़ी बैठक
26 अक्टूबर को लाहौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मजबूत करने के उद्देश्य से गोलमेज बैठक आयोजित की गई। इसमें पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों, प्रेस यूनियनों, राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक का संचालन वरिष्ठ पत्रकार मुनीजा जहांगीर ने किया, जबकि इसकी अध्यक्षता अनुभवी पत्रकार नासिर जैदी ने की।चर्चा के दौरान पत्रकारों के खिलाफ कानूनी उत्पीड़न, मीडिया संस्थानों पर दबाव, डिजिटल सेंसरशिप और पेशेवर असुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए गए।प्रतिनिधियों ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सभी संगठनों को साझा मंच पर आने की आवश्यकता है।
प्रेस की आजादी बचाने के लिए बनेगी संयुक्त समिति
बैठक में पत्रकारों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति जताई।इस समिति का उद्देश्य प्रेस स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामलों का दस्तावेजीकरण करना, पत्रकार संगठनों के बीच तालमेल बढ़ाना और सरकार के सामने मांगों का संयुक्त घोषणापत्र प्रस्तुत करना होगा।बैठक में वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर, मुजीबुर रहमान शामी, सोहेल वराइच, नजम सेठी और असमा शिराजी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने पत्रकारों के बीच एकजुटता बढ़ाने पर जोर दिया।प्रतिभागियों का मानना था कि पत्रकार संगठनों के अलग-अलग प्रयासों के बजाय संयुक्त रणनीति तैयार करना अधिक प्रभावी हो सकता है।
साइबर अपराध कानून के दुरुपयोग पर सवाल
पाकिस्तान में पत्रकार संगठनों की सबसे बड़ी चिंताओं में इलेक्ट्रॉनिक अपराध रोकथाम अधिनियम (PECA) शामिल है।इस कानून में वर्ष 2025 में किए गए संशोधनों को लेकर पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं।आलोचकों का आरोप है कि कानून का इस्तेमाल झूठी खबरों पर रोक लगाने के बजाय सरकार और संस्थानों की आलोचना करने वाले पत्रकारों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है।इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (IFJ) ने मई 2026 में जारी रिपोर्ट में भी कहा था कि साइबर अपराध कानून के जरिए पत्रकारों के खिलाफ जांच, गिरफ्तारी और मुकदमों का खतरा बढ़ा है।
पत्रकारों के खिलाफ 233 घटनाएं दर्ज
पाकिस्तान प्रेस फाउंडेशन की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच पत्रकारों को निशाना बनाए जाने से संबंधित कम से कम 233 घटनाएं दर्ज की गईं।इनमें 67 हमले, 67 आपराधिक शिकायतें, 11 गिरफ्तारियां, 11 हिरासत में लिए जाने और तीन अपहरण के मामले शामिल थे।रिपोर्ट के अनुसार, 67 आपराधिक शिकायतों में से 34 मामलों में PECA कानून का इस्तेमाल किया गया था।इन आंकड़ों से पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की स्थिति कमजोर
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में पाकिस्तान 180 देशों में 153वें स्थान पर रहा।सितंबर 2026 में नौ पाकिस्तानी और अंतरराष्ट्रीय पत्रकार तथा मानवाधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर हस्तक्षेप करने की मांग की थी।संगठनों ने पत्रकारों के खिलाफ साइबर अपराध कानून के कथित दुरुपयोग, रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध और समाचार संस्थानों पर दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की थी।
ऑनलाइन धमकियों और आर्थिक असुरक्षा से भी परेशान पत्रकार
पत्रकार संगठनों ने केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर धमकियों, ऑनलाइन उत्पीड़न और आर्थिक असुरक्षा को भी प्रमुख समस्या बताया है।कई मीडिया संस्थानों में वेतन भुगतान में देरी, नौकरियों की असुरक्षा और सरकारी विज्ञापनों के जरिए कथित दबाव बनाए जाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।अंतरराष्ट्रीय पत्रकार महासंघ की रिपोर्ट में भी आर्थिक दबाव और कमजोर श्रम सुरक्षा को मीडिया की स्वतंत्रता के लिए चुनौती बताया गया है।
प्रेस स्वतंत्रता की बहाली के लिए साझा रणनीति
बैठक में शामिल पत्रकारों और नागरिक संगठनों ने कहा कि स्वतंत्र मीडिया किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है।प्रतिनिधियों ने पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा, कानूनी सुरक्षा, सेंसरशिप पर रोक और मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।अब प्रस्तावित संयुक्त समिति की आगामी बैठकों और मांगपत्र पर नजर रहेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पत्रकार संगठनों की एकजुट पहल पर पाकिस्तान सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है।
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