सऊदी में हालात बिगड़े, अरामको कर्मचारियों को मुख्यालय खाली करने का निर्देश
हूती हमलों के बीच अरामको का फैसला
रियाद: सऊदी अरब में हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों के बीच सरकारी तेल कंपनी अरामको के धहरान मुख्यालय से कर्मचारियों को निकलने का निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है। मामले से परिचित सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों से कार्यालय आने के बजाय घर से काम करने को कहा गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्थित हूती समूह के बीच संघर्ष तेज हुआ है। हालांकि, मुख्यालय खाली कराने की तत्काल वजह स्पष्ट नहीं हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यालय में पहले से सीमित संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। पिछले सप्ताह परिसर पर हुए हमले के बाद गैरजरूरी कर्मचारियों के लिए दूरस्थ काम की व्यवस्था लागू कर दी गई थी। अब वहां बचे आवश्यक कर्मचारियों को भी अगले निर्देश तक घर से काम करने को कहा गया है। इस कदम के साथ कार्यालय परिसर में कर्मचारियों की मौजूदगी और कम हो जाएगी।
निकासी को लेकर एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि गुरुवार को मुख्यालय में अलार्म बजने के बाद कर्मचारियों को बाहर निकाला गया। हालांकि, अलार्म की वजह और दूरस्थ काम की व्यवस्था कितने समय तक जारी रहेगी, इसकी जानकारी तत्काल सामने नहीं आई। अरामको और सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने उस रिपोर्ट पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इसलिए इस घटनाक्रम को किसी नए हमले की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। धहरान स्थित अरामको का परिसर कई कार्यालय भवनों और आवासीय हिस्सों में फैला हुआ है। सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों को कार्यालय से निकालने का निर्देश आवासीय क्षेत्रों को खाली कराने का आदेश नहीं था। परिसर के आवासीय हिस्सों को बंद या खाली नहीं कराया गया। यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुख्यालय के कर्मचारियों की निकासी और पूरे परिसर में रहने वाले लोगों को हटाना अलग-अलग कार्रवाई हैं।
पिछले सप्ताह मुख्यालय परिसर की एक इमारत पर हमला होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों में टावर की ऊपरी मंजिलों को नुकसान और आग लगने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, नुकसान के कुछ विवरण कर्मचारियों के बयानों पर आधारित थे और घटनास्थल तक पहुंच न होने के कारण उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी। हूती समूह ने अरामको मुख्यालय को निशाना बनाने का दावा किया था। ताजा निकासी की खबर से पहले बुधवार शाम धहरान के नजदीक दम्माम स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला हुआ था। इसमें एक सऊदी नागरिक और एक भारतीय नागरिक की मौत हुई तथा आठ लोग घायल हुए। सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के मुताबिक, गुरुवार को हवाई अड्डे पर परिचालन बहाल हो गया और हवाई यातायात सामान्य हो गया। यह हमला क्षेत्र में नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला घटनाक्रम है।
अरामको द्वारा संचालित शायबाह तेल क्षेत्र से संबंधित हमले की जानकारी भी सामने आई है। ऊर्जा मंत्रालय के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उस घटना से उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ। मुख्यालय में दूरस्थ काम की व्यवस्था लागू होने को भी अपने आप में तेल उत्पादन बंद होने के बराबर नहीं माना जा सकता। कार्यालय संचालन, तेल निकालने की गतिविधियां, प्रसंस्करण और निर्यात अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत चलते हैं। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने गुरुवार को रियाद और मदीना के क्षेत्रों में ड्रोन रोके जाने की जानकारी दी। दूसरी ओर, सऊदी अरब ने हूती हमलों के जवाब में मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों पर कार्रवाई की है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। अरामको मुख्यालय की निकासी की खबर के बाद गुरुवार को सऊदी शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक लगभग 2.5 प्रतिशत गिरा।
ऊर्जा कंपनी के मुख्यालय से कर्मचारियों को हटाने का निर्णय कारोबार जारी रखने की क्षमता पर भी सवाल उठाता है। दूरस्थ काम से कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली जा सकती हैं, लेकिन संयंत्रों और अन्य परिचालन प्रतिष्ठानों की जरूरतें अलग होती हैं। इसीलिए किसी कार्यालय की निकासी के आधार पर पूरे कारोबार की स्थिति का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। उत्पादन अथवा आपूर्ति में बदलाव का आकलन संबंधित आधिकारिक आंकड़ों से ही किया जा सकता है।
वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए भी घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। बड़े तेल उत्पादक क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी अनिश्चितता खरीदारों, परिवहन कंपनियों और निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकती है। फिर भी संभावित खतरे और वास्तविक आपूर्ति बाधा के बीच स्पष्ट अंतर है। उपलब्ध जानकारी से अरामको के पूरे तेल कारोबार के ठप होने या सभी प्रतिष्ठान खाली कराए जाने की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल कर्मचारियों को मुख्यालय से हटाकर घर से काम कराने की खबर सूत्रों पर आधारित है। निकासी की सटीक वजह, कार्यालय में सामान्य कामकाज बहाल होने की समयसीमा और व्यापक परिचालन प्रभाव को लेकर स्पष्ट आधिकारिक विवरण का इंतजार है। क्षेत्र में जारी हमलों के बीच कर्मचारियों की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।