नई दिल्ली: यूरोप में सोशल मीडिया के इस्तेमाल से युवाओं को अपराध के जाल में फंसाने वाले गिरोहों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ गैंग कथित तौर पर टीनएजर्स को ऑनलाइन संपर्क कर उन्हें हिंसक अपराधों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
सोशल मीडिया बना भर्ती का जरिया
जांच एजेंसियों के अनुसार, अपराधी गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन चैट के जरिए कम उम्र के युवाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्हें पैसे, पहचान और रोमांच का लालच देकर अपराधों में शामिल करने के आरोप सामने आए हैं।
‘एजेंट 47’ नाम से जुड़े मामलों की जांच
कुछ मामलों में कथित तौर पर एक ऑनलाइन पहचान या उपनाम ‘एजेंट 47’ का जिक्र सामने आया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इसके पीछे कौन लोग हैं और क्या यह किसी संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
युवाओं की ऑनलाइन सुरक्षा पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर मौजूद गुमनाम नेटवर्क और आसान संपर्क व्यवस्था का फायदा अपराधी उठा सकते हैं। कम उम्र के लोग कई बार ऑनलाइन प्रभाव, दबाव या लालच के कारण गलत रास्ते पर जा सकते हैं।
पुलिस और एजेंसियां कर रही निगरानी
यूरोपीय देशों की सुरक्षा एजेंसियां ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख रही हैं और ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए जांच अभियान चला रही हैं। अधिकारियों का फोकस युवाओं को ऐसे अपराधी समूहों से बचाने पर भी है।
अभिभावकों और युवाओं को सतर्क रहने की सलाह
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दें और युवाओं को संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क, लालच या धमकियों से सावधान रहने के लिए जागरूक करें।
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