ट्रंप भी मांगेंगे ईरान से मुआवजा हर बातचीत में उठेगा हर्जाने का मुद्दा
ट्रंप का ईरान पर बड़ा वार अब मुआवजे की मांग भी होगी बातचीत का हिस्सा
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में अब मुआवजे का मुद्दा भी अहम बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से होने वाली आगे की किसी भी बातचीत में अमेरिकी नागरिकों के लिए मुआवजे की मांग शामिल की जाएगी। ट्रंप का यह बयान ईरान की उस मांग के जवाब में आया है, जिसमें तेहरान ने पिछले पांच महीने के सैन्य संघर्ष के दौरान हुए नुकसान के लिए अमेरिका और इजरायल से मुआवजे की मांग की है।
ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान युद्ध के दौरान हुए नुकसान का हर्जाना मांग सकता है, तो अमेरिका भी ईरान से उन लोगों और परिवारों के लिए मुआवजा मांग सकता है, जिन्हें ईरानी गतिविधियों में नुकसान पहुंचा। उन्होंने इस मांग को अमेरिका-ईरान के बीच होने वाली सभी भविष्य की बातचीत का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए हैं।
ईरान ने अमेरिका से मांगा था युद्ध का हर्जाना
ईरान की ओर से हालिया वार्ता में अमेरिका और इजरायल से सैन्य संघर्ष के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की मांग सामने आई है। तेहरान का तर्क है कि अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई के कारण ईरान को भारी नुकसान हुआ है और किसी भी समझौते में इस नुकसान की भरपाई का प्रावधान होना चाहिए।
ईरान की यह मांग ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिति को सामान्य बनाने को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का मुद्दा इन वार्ताओं के केंद्र में है। ईरान की ओर से मुआवजे की मांग को ट्रंप ने खारिज करने के बजाय पलटवार के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया है।
ट्रंप ने भी रख दी अपनी शर्त
ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका भी ईरान से मुआवजा मांग करेगा। उनके मुताबिक, ईरान की गतिविधियों में मारे गए और गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की जाएगी।
ट्रंप ने विशेष रूप से उन लोगों का उल्लेख किया जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान समर्थित गतिविधियों या संघर्षों में नुकसान पहुंचा। उन्होंने अपने बयान में सड़क किनारे बम हमलों और दूसरे संघर्षों का भी जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मांग को भविष्य में होने वाली हर बातचीत में मजबूती से रखा जाएगा। यानी अब मुआवजा केवल एक अलग मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि संभावित शांति समझौते और अमेरिका-ईरान वार्ता की शर्तों का हिस्सा बन सकता है।
USS Cole हमले का भी किया जिक्र
ट्रंप ने अपनी मांग को पुराने मामलों से भी जोड़ दिया। उन्होंने USS Cole पर हुए हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए भी मुआवजे की बात कही।
अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक पोत USS Cole पर अक्टूबर 2000 में यमन के अदन बंदरगाह में आत्मघाती हमला हुआ था। इस हमले में अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। ट्रंप ने इस घटना को ईरान से मुआवजे की अपनी मांग के संदर्भ में जोड़ा। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि USS Cole हमले की जिम्मेदारी अल-कायदा ने ली थी। इसलिए ट्रंप के बयान में इस घटना को ईरान से जोड़ने को लेकर तथ्यात्मक और राजनीतिक बहस की गुंजाइश बनी हुई है।
पिछले 50 साल के प्रदर्शनों का भी जिक्र
ट्रंप ने ईरान के भीतर पिछले कई दशकों में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों के परिवारों के लिए भी मुआवजे की मांग की है। उन्होंने ईरानी सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई का आरोप लगाया।
उनका कहना है कि ईरान को उन परिवारों को भी मुआवजा देना चाहिए जिनके सदस्य सरकार विरोधी आंदोलनों के दौरान मारे गए। ट्रंप ने पिछले पांच महीनों में मारे गए लोगों की संख्या का भी बड़ा आंकड़ा बताया, हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से अलग तरीके से होती है। इस तरह ट्रंप की मांग केवल मौजूदा युद्ध के नुकसान तक सीमित नहीं है। उन्होंने ईरान की दशकों पुरानी गतिविधियों और संघर्षों से जुड़े मामलों को भी संभावित मुआवजे की सूची में शामिल करने की बात कही है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण है। यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
इस जलमार्ग में किसी भी तरह की रुकावट से कच्चे तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से अमेरिका और अन्य देशों के लिए होर्मुज को सुरक्षित और खुला रखना बड़ी प्राथमिकता है।
हालिया वार्ताओं में ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर कई शर्तें सामने आई हैं। अमेरिका भी इस मुद्दे को व्यापक समझौते का हिस्सा बनाना चाहता है।
मुआवजा अब वार्ता का नया मोर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पहले ही कई कठिन मुद्दों से घिरी हुई है। परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, क्षेत्रीय प्रभाव, प्रतिबंधों में राहत और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुद्दे दोनों पक्षों के बीच मतभेद का कारण हैं।
अब मुआवजा भी इस सूची में जुड़ गया है।
ईरान चाहता है कि अमेरिका और इजरायल सैन्य संघर्ष से हुए नुकसान की भरपाई करें। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान की ओर से अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को हुए कथित नुकसान का हवाला देकर उलटा मुआवजा मांग रहा है। इससे बातचीत और जटिल हो सकती है। दोनों पक्ष यदि अपने-अपने नुकसान की भरपाई को समझौते की शर्त बनाते हैं, तो किसी अंतिम समझौते तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
ट्रंप का रुख पहले से ज्यादा सख्त
ट्रंप का ताजा बयान यह संकेत देता है कि अमेरिका केवल युद्ध समाप्त करने या होर्मुज खोलने पर समझौता नहीं करना चाहता। वह संभावित समझौते में ईरान से कई तरह की रियायतें और जिम्मेदारियां तय करवाना चाहता है।
ट्रंप ने पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अब मुआवजे का मुद्दा जोड़कर उन्होंने वार्ता का दायरा और बढ़ा दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने ईरान की मांग के जवाब में कहा कि यदि तेहरान युद्ध के नुकसान का हर्जाना मांग रहा है तो अमेरिका भी अपनी ओर से मुआवजे की मांग करेगा।
ईरान के लिए क्या होगी चुनौती?
ईरान पहले से ही आर्थिक प्रतिबंधों, युद्ध के नुकसान और क्षेत्रीय तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में अमेरिका को मुआवजा देने की मांग तेहरान के लिए बेहद कठिन शर्त हो सकती है। यदि अमेरिका इस मांग को किसी शांति समझौते की अनिवार्य शर्त बनाता है, तो ईरान के सामने बड़ा राजनीतिक फैसला होगा। उसे यह तय करना होगा कि वह आर्थिक और कूटनीतिक दबाव कम करने के लिए किस हद तक अमेरिकी शर्तों को स्वीकार कर सकता है।
दूसरी ओर, ईरान में अमेरिका को मुआवजा देने का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो सकता है। तेहरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य दबाव को अपने खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश करता रहा है।
क्या समझौता और मुश्किल होगा?
विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुआवजे की मांग अमेरिका-ईरान वार्ता को किस दिशा में ले जाएगी। यदि दोनों पक्ष अपने-अपने नुकसान के लिए एक-दूसरे से भुगतान मांगते हैं, तो बातचीत में समझौते की जगह आरोप-प्रत्यारोप बढ़ सकते हैं। दूसरी ओर, यदि दोनों देश मुआवजे के मुद्दे को व्यापक समझौते के तहत किसी फॉर्मूले से हल करने पर सहमत होते हैं, तो यह विवाद को खत्म करने का रास्ता भी बन सकता है। फिलहाल ट्रंप का बयान संकेत देता है कि अमेरिका इस मुद्दे को पीछे हटाने के मूड में नहीं है।
ट्रंप ने प्रतिनिधियों को दिए निर्देश
ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि ईरान से मुआवजे की मांग को भविष्य की सभी वार्ताओं में मजबूती से रखा जाए। इसका मतलब है कि यह मांग केवल सार्वजनिक बयान तक सीमित नहीं रहने वाली। अमेरिकी वार्ताकारों के लिए अब यह एक औपचारिक बातचीत का मुद्दा बन सकता है। यदि ईरान इसके विरोध में अपनी मांगों पर कायम रहता है, तो दोनों देशों के बीच समझौते के लिए कई स्तरों पर बातचीत करनी होगी।
इजरायल की भूमिका भी अहम
इस पूरे विवाद में इजरायल की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ईरान अमेरिका और इजरायल दोनों से युद्ध के दौरान हुए नुकसान का मुआवजा मांग रहा है। अमेरिका की ओर से भी ईरान पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसने वर्षों से क्षेत्र में ऐसे समूहों और गतिविधियों का समर्थन किया जिनसे अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों को नुकसान हुआ। इस तरह मुआवजे का मुद्दा केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इजरायल और मध्य पूर्व के व्यापक सुरक्षा समीकरण भी जुड़े हुए हैं।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान ट्रंप की नई मांग पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि तेहरान अपनी मुआवजे की मांग पर कायम रहता है और वॉशिंगटन भी अमेरिकी पीड़ितों के लिए भुगतान की शर्त रखता है, तो बातचीत में एक नया गतिरोध पैदा हो सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और व्यापक शांति समझौते के लिए पहले से ही कई कठिन मुद्दे मौजूद हैं। ऐसे में मुआवजे की मांग दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया को और जटिल कर सकती है।