रूसी तेल आयात को लेकर ट्रंप का रुख बदला, भारत पर 100% टैरिफ लगाने की संभावना

टैरिफ पर ट्रंप का यू-टर्न! रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 500% नहीं, 100% टैक्स की चर्चा

Update: 2026-07-15 03:00 GMT

Russian : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित कठोर टैरिफ को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। पहले जहां रूस से ऊर्जा आयात जारी रखने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की चर्चा थी, वहीं अब यह दर घटाकर 100% किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस बदलाव का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं।

500% टैरिफ से 100% तक कैसे पहुंची चर्चा?
अमेरिकी राजनीति में रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक प्रस्ताव सामने आया था, जिसमें रूस से तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 500% तक का सेकेंडरी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से होने वाली कमाई को सीमित करना था।
हालांकि, हालिया संकेतों के अनुसार ट्रंप प्रशासन के करीबी हलकों में इस प्रस्ताव को अधिक व्यावहारिक बनाने पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत 500% की जगह 100% टैरिफ लगाने का विकल्प सामने आया है, ताकि सहयोगी देशों के साथ व्यापारिक तनाव को कम रखा जा सके।
भारत क्यों है चर्चा के केंद्र में?
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ाया। इससे भारत को ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने और घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिली।
यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ सकता है। हालांकि अभी तक भारत पर किसी नए टैरिफ की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
क्या है 100% टैरिफ का मतलब?
यदि 100% टैरिफ लागू होता है, तो प्रभावित उत्पादों पर आयात शुल्क दोगुना हो जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी भारतीय उत्पाद की कीमत 100 डॉलर है, तो उस पर 100 डॉलर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे उसकी अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि टैरिफ किन उत्पादों पर लागू किया जाता है और किन देशों को इसमें शामिल किया जाता है।
भारत की रणनीति
भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा के आधार पर होती है। नई दिल्ली का तर्क है कि वह वैश्विक बाजार में उपलब्ध सबसे किफायती स्रोतों से तेल खरीदती है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करती है।
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है और किसी भी देश के साथ उसका व्यापार राष्ट्रीय हितों के अनुरूप होता है।
वैश्विक बाजार पर संभावित असर
यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कठोर टैरिफ लागू करता है, तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 500% की तुलना में 100% टैरिफ अपेक्षाकृत कम कठोर होगा, लेकिन फिर भी यह वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल 500% या 100% टैरिफ को लेकर कोई अंतिम अमेरिकी सरकारी आदेश लागू नहीं हुआ है। यह प्रस्ताव और राजनीतिक चर्चा के स्तर पर है। अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। ऐसे में भारत सहित अन्य देशों की नजर अमेरिकी नीति के अगले कदम पर बनी हुई है।
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