यूक्रेन का दावा: रूस के सैन्य सप्लाई नेटवर्क पर बड़ा हमला, तेल डिपो भी तबाह
नई दिल्ली: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने बुधवार को रूस के कई अहम सैन्य और लॉजिस्टिक्स ठिकानों और तेल भंडार केंद्रों को पर लंबी दूरी के हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद रूस पर दबाव बनाकर उसे कूटनीति और शांति की राह पर लाना है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, ''यूक्रेन के लंबी दूरी तक मार करने वाले हमलों ने रूस के क्रास्नोडार और स्टावरोपोल क्षेत्रों में अहम ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इनमें ऐसे लॉजिस्टिक्स हब शामिल थे, जहां से रूसी सेना को ड्रोन के पुर्जे, नेविगेशन उपकरण और दूसरे जरूरी सामान की सप्लाई की जाती थी। इसके अलावा एक और तेल भंडारण केंद्र पर भी हमला किया गया।''
जेलेंस्की ने कहा कि काला सागर और आजोव सागर के पानी में भी रूस के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' के एक टैंकर और चार मालवाहक जहाजों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि इन कामयाब कार्रवाइयों के लिए हम यूक्रेन की रक्षा सेनाओं के सभी जवानों का धन्यवाद करते हैं। हम पूरी तरह जायज तरीके से इस युद्ध को वापस रूस की धरती तक ले जा रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि शांति की जरूरत है, और यूक्रेन ने रूसी पक्ष के सामने हर तरह का प्रस्ताव रखा है। अब उन्हें कूटनीति का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए। रूस और यूक्रेन की तनातनी के बीच दोनों ओर से लगातार हमलों का दौर जारी है। एक दिन पहले मंगलवार को ही रूस ने यूक्रेन पर भीषण हमले किए थे। जेलेंस्की ने इन हमलों को युद्ध के नियमों के खिलाफ बताया था क्योंकि ये हमले बहुमंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाकर किए गए थे। रूस के इन हवाई हमलों में जापोरिज्जिया, खेरसोन और ओडेसा में कई लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने एक सामान्य बहुमंजिला रिहायशी इमारत को निशाना बनाया। पहली से सातवीं मंजिल तक के फ्लैटों में आग लग गई है। मौके पर सभी जरूरी सेवाएं मौजूद हैं। बचाव दल और डॉक्टर लोगों की मदद के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।
यूक्रेनी राष्ट्रपति अपने साझेदार देशों से लगातार मदद की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे साझेदार देशों का यूक्रेन का समर्थन जारी रखना बहुत जरूरी है। यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज को मंजूरी मिलनी चाहिए और हमारी रक्षा के लिए मदद भी जारी रहनी चाहिए। यह भी बेहद जरूरी है कि सेना और अधिकारियों के साथ जिन हथियारों और रूस का मुकाबला करने के लिए जरूरी उपकरणों पर हमने चर्चा की है, उन्हें निर्माता कंपनियां जितनी जल्दी हो सके उपलब्ध कराएं। लोगों की जान बचाने में जो भी मदद मिल सकती है, उसे बिना देरी के लागू किया जाना चाहिए।