वॉशिंगटन : अमेरिका ने चीन से जुड़े व्यापार को लेकर भारत समेत 40 से ज्यादा देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि कुछ देश चीनी कंपनियों को अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए सामान दूसरे रास्तों से भेजने में मदद कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को अमेरिका ने "ट्रांसशिपमेंट" नेटवर्क बताया है।
अमेरिका के मुताबिक, चीनी कंपनियां अपने उत्पादों को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेज रही हैं, ताकि सामान का मूल देश छिपाया जा सके और चीन पर लगाए गए भारी आयात शुल्क से बचा जा सके। अमेरिकी रिपोर्ट में भारत, यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया समेत कई देशों का नाम लिया गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने इस मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम तैयार करने की योजना बनाई है। इस तकनीक के जरिए संदिग्ध शिपमेंट, सप्लाई चेन, सामान की उत्पत्ति और व्यापारिक पैटर्न की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसी कंपनियों की पहचान करना है जो कथित तौर पर टैरिफ नियमों को चकमा देने की कोशिश कर रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि चीन कई देशों के जरिए अपने निर्यात को अमेरिकी बाजार तक पहुंचा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान और सरकार को अरबों डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हो सकता है।
भारत का नाम इस सूची में आने के बाद व्यापार विशेषज्ञों की नजरें दोनों देशों के रिश्तों पर टिक गई हैं। हालांकि, किसी भारतीय कंपनी पर सीधे तौर पर कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। अमेरिका का फोकस कथित अवैध व्यापार मार्गों और नियमों के उल्लंघन की पहचान पर है।
अमेरिका की नई AI आधारित निगरानी व्यवस्था वैश्विक सप्लाई चेन की जांच को और सख्त कर सकती है। इससे उन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है जो चीन से जुड़े सामान को दूसरे देशों के रास्ते अमेरिकी बाजार में पहुंचाने की कोशिश करती हैं।
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