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सोने की तस्करी में 1500% उछाल! सरकार के फैसले पर उठे सवाल

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 5:53 PM IST
सोने की तस्करी में 1500% उछाल! सरकार के फैसले पर उठे सवाल
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बिज़नेस : भारत में सोने की तस्करी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। केंद्र सरकार ने विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने और सोने के आयात को नियंत्रित करने के उद्देश्य से मई 2026 में आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। लेकिन इस फैसले के बाद देश में अवैध तरीके से सोना लाने की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में अनौपचारिक माध्यमों से भारत पहुंचने वाले सोने की अनुमानित मात्रा बढ़कर 50 टन हो गई। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 3 टन था।
इस तरह एक साल के भीतर अनौपचारिक सोने के आयात में लगभग 1,567 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि आयात शुल्क बढ़ने के बाद वैध और अवैध माध्यमों से सोना लाने की लागत में अंतर काफी बढ़ गया है। हालांकि, ये तस्करी के मामलों की आधिकारिक गिनती नहीं, बल्कि बाजार में अनौपचारिक आपूर्ति के अनुमान हैं।
सरकार ने क्यों बढ़ाया था सोने पर आयात शुल्क?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। देश में सोने का इस्तेमाल आभूषण बनाने के अलावा निवेश और धार्मिक अवसरों पर भी बड़े पैमाने पर होता है।घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत को सोने का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है।2026 में ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये पर दबाव ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी थीं।इसी परिस्थिति में केंद्र सरकार ने 13 मई 2026 से सोने और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया।सरकार का उद्देश्य आयात को नियंत्रित करना, व्यापार घाटे को सीमित रखना और विदेशी मुद्रा की मांग कम करना था।
3 टन से सीधे 50 टन पहुंचा अवैध सोना
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2025 की तिमाही में अनौपचारिक माध्यमों से लगभग 3 टन सोना भारत आया था।इसके मुकाबले जुलाई-सितंबर 2026 में यह मात्रा बढ़कर करीब 50 टन हो गई।दोनों अवधियों की तुलना करने पर लगभग 47 टन की बढ़ोतरी सामने आती है।यह उछाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2025 में सोने पर आयात शुल्क कम रहने से अवैध कारोबार का आर्थिक फायदा अपेक्षाकृत सीमित था।लेकिन 2026 में शुल्क बढ़ने से वैध आयात की लागत बढ़ गई। इससे अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से सोना लाने वालों के लिए मुनाफे की संभावना बढ़ी।
तस्करों को कैसे मिलता है फायदा?
सोने के आयात पर शुल्क बढ़ने से विदेश से वैध तरीके से सोना मंगाना महंगा हो जाता है।उदाहरण के लिए, यदि किसी सोने की खेप का आयात मूल्य 10 लाख रुपये है, तो 6 प्रतिशत शुल्क के हिसाब से 60 हजार रुपये का शुल्क बनता है।वहीं, 15 प्रतिशत की दर से शुल्क बढ़कर 1.50 लाख रुपये हो जाता है।यानी समान आयात मूल्य पर 90 हजार रुपये का अतिरिक्त अंतर पैदा होता है।यही अंतर अवैध कारोबार करने वालों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बन सकता है।हालांकि, वास्तविक आयात लागत में अन्य कर, नियम और खर्च भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए यह उदाहरण केवल शुल्क में बदलाव को समझाने के लिए है।
वैध आयात में आई भारी गिरावट
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2026 की तीसरी तिमाही में भारत का आधिकारिक बुलियन आयात, जिसमें गोल्ड डोरे भी शामिल है, घटकर लगभग 64 टन रह गया।यह पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले करीब 70 प्रतिशत कम था।रिपोर्ट में इस गिरावट के पीछे सोने की ऊंची कीमतों, आयात शुल्क में बढ़ोतरी, भंडार संबंधी समायोजन और त्योहारों के समय में अंतर जैसे कारण बताए गए हैं।इसके विपरीत अनौपचारिक आयात में तेजी दर्ज की गई।इससे सोने की आपूर्ति का एक हिस्सा औपचारिक माध्यमों से हटकर अनौपचारिक कारोबार की ओर जाने का संकेत मिलता है।
बैंक और रिफाइनरी कारोबार पर असर
सोने की तस्करी बढ़ने से केवल सरकार के राजस्व पर ही असर नहीं पड़ता, बल्कि वैध कारोबार करने वाले बैंक, आयातक और रिफाइनरी भी प्रभावित हो सकते हैं।वैध आयातकों को निर्धारित शुल्क और नियमों का पालन करना होता है।दूसरी ओर, अवैध माध्यमों से आने वाला सोना यदि कम कीमत पर बाजार में उपलब्ध होता है, तो इससे औपचारिक कारोबारियों के लिए प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है।जून में प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट में भी व्यापारियों ने चेतावनी दी थी कि ऊंचे आयात शुल्क के कारण तस्करी फिर बढ़ सकती है।कुछ कारोबारियों ने 2026 में अवैध सोने का आयात 100 टन से अधिक पहुंचने की आशंका भी जताई थी। हालांकि, यह अनुमान था, कोई पुष्ट वार्षिक आंकड़ा नहीं।
पहले शुल्क घटने से कम हुई थी तस्करी
भारत में सोने के आयात शुल्क और तस्करी के बीच संबंध पहले भी देखने को मिला है।जुलाई 2024 में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत किया था।इसके बाद अवैध आयात में कमी आने की रिपोर्ट सामने आई थी।रॉयटर्स के अनुसार, भारत में अवैध सोने का आयात 2023 के लगभग 156.1 टन से घटकर 2024 में 69.2 टन और 2025 में 20.4 टन रह गया था।लेकिन मई 2026 में शुल्क बढ़ने के बाद इस रुझान में बदलाव दिखाई देने लगा।इससे संकेत मिलता है कि बहुत अधिक आयात शुल्क तस्करी के लिए आर्थिक प्रोत्साहन बढ़ा सकता है।
सोने की मांग पर भी पड़ा असर
देश में सोने की ऊंची कीमतों और आर्थिक परिस्थितियों का असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी दिखाई दे रहा है।वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही में भारत में सोने की कुल मांग लगभग 162 टन रही।यह पिछली तिमाही के मुकाबले करीब 24 प्रतिशत अधिक थी, लेकिन पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 29 प्रतिशत कम रही।वहीं, पहले नौ महीनों में सोने की कुल मांग 444 टन रही, जो सालाना आधार पर 12 प्रतिशत कम थी।अर्थात सोने पर खर्च बढ़ने के बावजूद खरीदी गई मात्रा में गिरावट देखी गई है।इसकी एक बड़ी वजह ऊंची कीमतें हैं, जिनके कारण आम उपभोक्ताओं के लिए सोना खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।
क्या सरकार फिर घटाएगी आयात शुल्क?
अनौपचारिक सोने के आयात में तेज बढ़ोतरी के बाद आयात शुल्क की नीति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।सरकार के सामने एक ओर विदेशी मुद्रा और व्यापार घाटे को नियंत्रित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर अवैध आयात को रोकना भी आवश्यक है।हालांकि, अब तक शुल्क घटाने का कोई नया आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सीमा शुल्क बढ़ाने या घटाने से तस्करी की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती। इसके लिए प्रभावी निगरानी, वैध व्यापार को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अवैध नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान बताते हैं कि सोने पर आयात शुल्क बढ़ने के बाद भारत में अनौपचारिक सोने की आपूर्ति तेजी से बढ़ी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विदेशी मुद्रा बचाने और तस्करी रोकने के बीच किस तरह संतुलन बनाती है।
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