डेटा सेंटर की रेस में अदाणी का बड़ा दांव, अरबों डॉलर के निवेश से बढ़ाई बढ़त

Business : भारत में डेटा सेंटर का कारोबार तेजी से बड़े उद्योग का रूप ले रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन सेवाओं की बढ़ती मांग ने डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की जरूरत को कई गुना बढ़ा दिया है। यही वजह है कि देश के बड़े कारोबारी घराने इस सेक्टर में भारी निवेश कर रहे हैं।
इस दौड़ में गौतम अदाणी के नेतृत्व वाला अदाणी समूह सबसे आक्रामक योजनाओं के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। समूह ने डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने भविष्य के सबसे बड़े कारोबारों में शामिल कर लिया है। फरवरी 2026 में अदाणी समूह ने 2035 तक करीब 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश के जरिए ग्रीन एनर्जी से चलने वाले AI-ready डेटा सेंटर विकसित करने की योजना घोषित की थी।
यह निवेश केवल डेटा सेंटर की इमारतें बनाने तक सीमित नहीं है। अदाणी समूह डेटा सेंटर के साथ बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी, AI कंप्यूट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।
समूह का कहना है कि उसका डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म आने वाले वर्षों में 5 गीगावॉट यानी 5,000 मेगावॉट क्षमता तक पहुंच सकता है। अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो यह भारत के सबसे बड़े डेटा सेंटर नेटवर्क में शामिल होगा।
अदाणी समूह इस कारोबार को AdaniConneX के जरिए आगे बढ़ा रहा है। यह अदाणी समूह और वैश्विक डेटा सेंटर कंपनी EdgeConneX का संयुक्त उद्यम है। कंपनी देश के कई शहरों में बड़े डेटा सेंटर कैंपस विकसित कर रही है।
नोएडा, पुणे और विशाखापट्टनम जैसे शहर इस विस्तार योजना में खास भूमिका निभा रहे हैं। AdaniConneX की वेबसाइट के मुताबिक उसके विभिन्न प्रस्तावित और निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में बड़े स्तर की IT लोड क्षमता विकसित की जा रही है।
विशाखापट्टनम में अदाणी समूह की योजना खास तौर पर चर्चा में है। यहां Google के साथ मिलकर बड़े AI डेटा सेंटर कैंपस पर काम किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
Google की ओर से भारत में घोषित AI हब से जुड़ा निवेश करीब 15 अरब डॉलर का है, जिसमें डेटा सेंटर ऑपरेशन, समुद्री केबल नेटवर्क और ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट में AdaniConneX भी अहम भागीदार है।
हालांकि डेटा सेंटर की इस रेस में अदाणी अकेले नहीं हैं। मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज भी बड़े स्तर पर AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है।
रिलायंस ने गुजरात के जामनगर में AI डेटा सेंटर पर काम शुरू किया है। Meta ने जून 2026 में रिलायंस के साथ समझौता किया, जिसके तहत Meta रिलायंस द्वारा विकसित किए जा रहे 168 मेगावॉट के AI-ready डेटा सेंटर का इस्तेमाल करेगी।
इससे साफ है कि देश के दो सबसे बड़े औद्योगिक समूह भविष्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं।
डेटा सेंटर कारोबार में भारती एयरटेल भी तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी की डेटा सेंटर इकाई Nxtra देश में अपना नेटवर्क बढ़ा रही है। मार्च 2026 में Nxtra में करीब 1 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा हुई थी।
इस फंडिंग में Alpha Wave Global, Carlyle, Anchorage Capital और खुद भारती एयरटेल शामिल हैं। इस निवेश का मकसद AI डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाना और देश के प्रमुख शहरों में नए कैंपस विकसित करना है।
Nxtra की मौजूदा क्षमता करीब 300 मेगावॉट बताई गई है और कंपनी आने वाले वर्षों में इसे लगभग 1 गीगावॉट तक ले जाने की योजना बना रही है।
इन बड़े समूहों के अलावा देश और विदेश की कई दूसरी कंपनियां भी इस सेक्टर में निवेश बढ़ा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण AI है।
पहले डेटा सेंटर मुख्य रूप से वेबसाइट, मोबाइल ऐप, क्लाउड स्टोरेज और बैंकिंग सेवाओं के लिए जरूरी होते थे। लेकिन अब जनरेटिव AI और बड़े AI मॉडल के आने से कंप्यूटिंग पावर की जरूरत कई गुना बढ़ गई है।
AI डेटा सेंटर में शक्तिशाली GPU, हाई-परफॉर्मेंस सर्वर और एडवांस कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है। इन सुविधाओं को चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली भी चाहिए।
यही वह क्षेत्र है जहां अदाणी समूह अपने एनर्जी बिजनेस का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। समूह पहले से ही बिजली उत्पादन, रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन में बड़े स्तर पर मौजूद है। ऐसे में डेटा सेंटर को सीधे ग्रीन एनर्जी उपलब्ध कराने की क्षमता उसे अतिरिक्त बढ़त दे सकती है।
अदाणी ने जून 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Jabil के साथ भी AI डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म बनाने के लिए रणनीतिक गठजोड़ की दिशा में कदम बढ़ाया। इसका लक्ष्य AI रैक और दूसरे जरूरी डेटा सेंटर उपकरण भारत में तैयार करना है।
इस रणनीति का मतलब है कि अदाणी केवल डेटा सेंटर ऑपरेटर नहीं बनना चाहता, बल्कि पूरे AI इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में मौजूदगी बढ़ाना चाहता है।
भारत का डेटा सेंटर बाजार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। CBRE के मुताबिक 2026 के अंत तक देश की ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता करीब 2 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। सिर्फ 2026 की पहली छमाही में 130 मेगावॉट से ज्यादा नई क्षमता जुड़ी और दूसरी छमाही में 200 मेगावॉट से ज्यादा क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।
मुंबई अभी देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब है, लेकिन हैदराबाद, चेन्नई, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु, पुणे और विशाखापट्टनम जैसे शहर भी तेजी से उभर रहे हैं।
डेटा सेंटर की बढ़ती मांग के पीछे भारत में इंटरनेट यूजर्स की बड़ी संख्या, डिजिटल पेमेंट, OTT प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, 5G, क्लाउड सेवाएं और डेटा लोकलाइजेशन जैसे कारण शामिल हैं।
इसके साथ ही AI कंपनियों और वैश्विक टेक कंपनियों की भारत में बढ़ती मौजूदगी ने भी इस सेक्टर को नई रफ्तार दी है।
हालांकि डेटा सेंटर कारोबार आसान नहीं है। इसमें बहुत बड़ी पूंजी की जरूरत होती है। साथ ही बिजली, जमीन, पानी, कूलिंग सिस्टम और हाई-स्पीड फाइबर नेटवर्क जैसी सुविधाएं भी जरूरी होती हैं।
AI डेटा सेंटर में बिजली की खपत सामान्य डेटा सेंटर से काफी ज्यादा हो सकती है। यही वजह है कि भविष्य में इस उद्योग के लिए सस्ती और भरोसेमंद बिजली सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है।
अदाणी समूह इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डेटा सेंटर और ग्रीन एनर्जी को एक साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। समूह का लक्ष्य केवल सर्वर रखने की जगह उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बिजली से लेकर कंप्यूटिंग तक पूरा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।
दूसरी ओर रिलायंस, एयरटेल और दूसरी कंपनियां भी लगातार निवेश बढ़ा रही हैं। इसलिए डेटा सेंटर बाजार में मुकाबला आने वाले वर्षों में और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल घोषित निवेश योजनाओं के पैमाने को देखें तो अदाणी समूह ने बेहद बड़ा दांव लगाया है। 100 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश और 5 गीगावॉट AI-ready डेटा सेंटर क्षमता के लक्ष्य ने उसे इस दौड़ के सबसे आक्रामक खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।
कुल मिलाकर भारत का डेटा सेंटर सेक्टर अब केवल IT इंफ्रास्ट्रक्चर का कारोबार नहीं रह गया है। यह AI, ऊर्जा, क्लाउड, डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय डेटा सुरक्षा से जुड़ा बड़ा रणनीतिक उद्योग बनता जा रहा है। अदाणी, रिलायंस और एयरटेल जैसे कारोबारी समूहों की बढ़ती दिलचस्पी साफ संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर भारत के सबसे बड़े निवेश क्षेत्रों में से एक बन सकता है।





