Bank ऑफ बड़ौदा के तिमाही नतीजों ने चौंकाया, मुनाफे में भारी कमी

नई दिल्ली : सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून 2026 के वित्तीय नतीजे जारी कर दिए हैं। बैंक के तिमाही परिणामों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक के शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सालाना आधार पर बैंक का मुनाफा करीब 72 प्रतिशत घटकर ₹1278.39 करोड़ रह गया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के लिए यह गिरावट पिछले साल की समान अवधि की तुलना में काफी बड़ी मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जून तिमाही में बैंक ने ₹4541.36 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया था। इस तरह एक साल में बैंक के मुनाफे में करीब ₹3262 करोड़ से ज्यादा की कमी आई है।
हालांकि, बैंक की कुल आय में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में बैंक की कुल आय सालाना आधार पर 2.6 प्रतिशत बढ़कर ₹36,681.09 करोड़ हो गई है। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक की कुल आय इससे कम थी। आय में बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में गिरावट ने बैंक के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित किया है।
बैंक के ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी हल्की गिरावट देखने को मिली है। प्रोविजन और आकस्मिक खर्चों से पहले बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत घटकर ₹8,127.25 करोड़ रह गया। बैंक के प्रदर्शन पर बढ़े हुए प्रावधान खर्चों और अन्य वित्तीय दबावों का असर देखने को मिला है।
बैंकिंग सेक्टर में प्रोविजन एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिसका उपयोग बैंक संभावित नुकसान या खराब कर्ज (एनपीए) से जुड़े जोखिमों के लिए करते हैं। तिमाही के दौरान इन खर्चों में बदलाव का सीधा असर बैंक के अंतिम मुनाफे पर दिखाई देता है।
वित्तीय नतीजों के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयरों में तेजी देखने को मिली। 24 जुलाई को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर बैंक ऑफ बड़ौदा के शेयर की कीमत 1.48 प्रतिशत बढ़कर ₹246.60 पर बंद हुई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब बैंक की आगे की रणनीति, कर्ज वृद्धि, एसेट क्वालिटी और मुनाफे में सुधार की संभावनाओं पर रहेगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। बैंक घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सेवाएं प्रदान करता है। बैंक की आय का बड़ा हिस्सा कर्ज वितरण, ब्याज आय और अन्य बैंकिंग सेवाओं से आता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ब्याज दरों में बदलाव और कर्ज से जुड़े जोखिमों का असर बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन पर पड़ता है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में बैंक की रणनीति और परिचालन सुधारों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
बैंक ऑफ बड़ौदा के ताजा नतीजे बताते हैं कि आय में बढ़ोतरी के बावजूद मुनाफे में बड़ी गिरावट चुनौती बनी हुई है। अब बैंक के सामने लाभप्रदता को दोबारा मजबूत करने, खर्चों को नियंत्रित करने और कारोबार विस्तार के साथ बेहतर वित्तीय प्रदर्शन करने की चुनौती होगी। आने वाली तिमाहियों में बैंक का प्रदर्शन यह तय करेगा कि वह इस गिरावट से कितनी जल्दी उबर पाता है।





