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सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा धमाका, 32 लाख रोजगार की तैयारी

Rajeshwari Nishad
4 Nov 2026 7:01 PM IST
सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा धमाका, 32 लाख रोजगार की तैयारी
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बिज़नेस : भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का बड़ा केंद्र बन सकता है। देश में सोलर मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने के लिए करीब 89 अरब डॉलर यानी लगभग 8.42 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की संभावना जताई गई है। इससे वर्ष 2047 तक करीब 32.3 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यह अनुमान इंडियन सोलर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) की नई रिपोर्ट में सामने आया है।
एसोसिएशन ने अपनी रिपोर्ट 'विजन 2047: सोलर मैन्युफैक्चरिंग फ्रॉम पॉलीसिलिकॉन टू पावर प्लांट' में भारत को सौर उपकरणों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने की संभावनाओं का उल्लेख किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि देश में सोलर मैन्युफैक्चरिंग की पूरी उत्पादन श्रृंखला विकसित की जाती है, तो भारत आयात पर निर्भरता घटाने के साथ निर्यात के बड़े अवसर भी हासिल कर सकता है।
2047 तक 89 अरब डॉलर निवेश की संभावना
आईएसएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2047 तक देश के सौर उपकरण निर्माण क्षेत्र में लगभग 89 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत और संभावना है।यह निवेश एक साथ नहीं होगा, बल्कि आने वाले दो दशकों में अलग-अलग चरणों में हो सकता है। रिपोर्ट में वर्ष 2027 से 2047 के बीच औसतन करीब 4.3 अरब डॉलर सालाना निवेश की आवश्यकता का अनुमान लगाया गया है।इस निवेश का बड़ा हिस्सा सोलर पैनल बनाने के साथ-साथ उनके लिए जरूरी कच्चे माल और तकनीकी उपकरणों के उत्पादन में लगाया जा सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, कुल संभावित निवेश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पॉलीसिलिकॉन, वेफर और सोलर सेल जैसे शुरुआती उत्पादन चरणों में जाने की उम्मीद है।इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत को विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
32.3 लाख लोगों को मिल सकता है रोजगार
सोलर मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 4.1 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार होने का अनुमान है।यह संख्या वर्ष 2030 तक बढ़कर करीब 8.1 लाख और 2047 तक 32.3 लाख पहुंच सकती है।इस तरह मौजूदा अनुमानित रोजगार की तुलना में लगभग आठ गुना विस्तार की संभावना जताई गई है।विशेष बात यह है कि रोजगार केवल सोलर पैनल बनाने वाली फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेंगे। मशीन निर्माण, तकनीकी रखरखाव, आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन और संबंधित औद्योगिक सेवाओं में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।हालांकि, ये आंकड़े भविष्य के अनुमान हैं। वास्तविक रोजगार सृजन निवेश, बाजार की मांग और उत्पादन इकाइयों की स्थापना पर निर्भर करेगा।
इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की बढ़ेगी मांग
सौर ऊर्जा निर्माण क्षेत्र का विस्तार तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर सकता है।रिपोर्ट में बताया गया है कि सोलर फोटोवोल्टिक निर्माण इकाइयों में प्रत्यक्ष रोजगार वर्तमान के लगभग 1.4 लाख से बढ़कर 2047 तक 11.1 लाख पहुंच सकता है।इनमें इंजीनियर, मशीन ऑपरेटर, उत्पादन विशेषज्ञ, गुणवत्ता नियंत्रण कर्मचारी और अनुसंधान से जुड़े पेशेवर शामिल हो सकते हैं।अनुमान के मुताबिक, भविष्य में प्रत्यक्ष विनिर्माण रोजगार का करीब 68 प्रतिशत हिस्सा पॉलीसिलिकॉन, वेफर और सोलर सेल उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है।ऐसे में तकनीकी शिक्षा, औद्योगिक प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सोलर पैनल से आगे बढ़ने की तैयारी
भारत में सौर ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन पूरी उत्पादन श्रृंखला को घरेलू स्तर पर विकसित करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।सोलर पैनल बनाने के लिए पॉलीसिलिकॉन, इंगट, वेफर और सोलर सेल जैसे कई महत्वपूर्ण घटकों की जरूरत होती है।यदि इनमें से अधिकांश उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ें, तो घरेलू सोलर उद्योग की लागत और आपूर्ति व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर रहती है।आईएसएमए का सुझाव है कि भारत को केवल तैयार सोलर मॉड्यूल बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।देश में कच्चे माल से लेकर अंतिम उत्पाद तक पूरी उत्पादन श्रृंखला स्थापित करने से औद्योगिक आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा सकती है।
सोलर उपकरणों का आयात हो सकता है कम
भारत के सामने सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी चुनौती आयात पर निर्भरता है।रिपोर्ट के मुताबिक, देश का वार्षिक सौर उपकरण आयात बिल लगभग 4.4 अरब डॉलर है।यदि घरेलू विनिर्माण क्षमता निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होती है, तो 2040 के दशक की शुरुआत तक इस आयात बिल में 95 प्रतिशत से अधिक कमी आने की संभावना जताई गई है।इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ घरेलू कंपनियों के लिए उत्पादन और निर्यात के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
पीएलआई योजना से निवेश को मिला प्रोत्साहन
केंद्र सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश आकर्षित करने में भूमिका निभाई है।आईएसएमए की रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक इस योजना से संबंधित परियोजनाओं में लगभग 8.4 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित हुआ था।रिपोर्ट का अनुमान है कि प्रोत्साहन के प्रत्येक एक डॉलर के मुकाबले लगभग चार डॉलर का निजी निवेश आया है।हालांकि, आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग और नए निवेश की आवश्यकता होगी।
सौर ऊर्जा उत्पादन में बड़े विस्तार का अनुमान
आईएसएमए के विजन 2047 परिदृश्य के अनुसार, भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 2047 तक लगभग 2,275 गीगावाट तक पहुंच सकती है।यह अनुमान मौजूदा नीतियों के आधार पर संभावित विकास की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी है।इतनी बड़ी क्षमता विकसित करने के लिए सोलर मॉड्यूल, सेल और अन्य उपकरणों की भारी मांग पैदा होगी।घरेलू कंपनियां यदि इस मांग को पूरा करने में सफल रहती हैं, तो देश में विनिर्माण उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।
निवेश को वास्तविकता बनाने के लिए क्या जरूरी?
आईएसएमए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सोलर मैन्युफैक्चरिंग के विकास के लिए स्थिर नीतियां, पर्याप्त घरेलू मांग और समय पर परियोजनाओं को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।एसोसिएशन ने रूफटॉप सोलर परियोजनाओं, कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल और घरेलू उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है।आईएसएमए के महासचिव अमित मनोहर के अनुसार, भारत के सामने प्रतिस्पर्धी और एकीकृत सौर विनिर्माण उद्योग विकसित करने का बड़ा अवसर है। हालांकि, इसके लिए दीर्घकालिक नीतिगत समर्थन और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, सोलर सेक्टर में 89 अरब डॉलर के संभावित निवेश और 32.3 लाख रोजगार का अनुमान भारत की हरित अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। यदि प्रस्तावित औद्योगिक विस्तार सफल होता है, तो वर्ष 2047 तक सौर ऊर्जा क्षेत्र देश के प्रमुख विनिर्माण और रोजगार क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।
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